उच्च शिक्षा की गुणवत्ता के लिए एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय पहली बार एकेडमिक ऑडिट कराएगा। कुलपति की अध्यक्षता में हुई इंटनरल क्वालिटी एस्सुरेंस सेल (आईक्यूएसी) की बैठक में यह निर्णय लिया गया है। शोध गुणवत्ता के लिए सभी पीएचडी थीसिस शोधगंगा पर अपलोड करने और कट पेस्ट रोकने के लिऐ एंटी-प्लेजरिज्म सॉफ्टवेयर खरीदा जाएगा। छात्रों की बायोमेट्रिक उपस्थिति लगेगी।
बैठक में सबसे पहले नैक मूल्यांकन पर चर्चा हुई। मई, 2016 में विश्वविद्यालय का नैक मूल्यांकन हुआ था, इसमें उसे बी ग्रेड मिला था। अब अगला नैक मूल्यांकन 2021 में होना है। विश्वविद्यालय में जो कमियां हैं उन्हें दूर करने का निर्णय लिया गया। विश्वविद्यालय के लिए दीर्घकालीन योजना बनाने को एक पैनल बनेगा। इसमें आईक्यूएसी के साथ एक्सपर्ट शामिल किए जाएंगे। हर साल एकेडमिक ऑडिट होगा। पुरातन छात्र संघ को पंजीकृत कराया जाएगा। विदेशों में जॉब कर रहे पुरातन छात्रों को देश में नौकरी के लिए आकर्षित करने को संबंधित देशों के दूतावासों से संपर्क किया जाएगा। कैंपस में संचालित सभी पीजी कोर्स में च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम लागू किया जाएगा। ई-वेस्ट मैनेजमेंट के लिए विश्वविद्यालय विभिन्न एजेंसियों से संपर्क करेगा। शिक्षकों के फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम, कर्मचारियों के लिए कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम चलाया जाएगा। गरीब छात्रों के लिए पूअर ब्वॉयज फंड बनेगा। इनोवेटिव प्रैक्टिस को प्रोत्साहित किया जाएगा। कैंपस में सॉफ्ट स्किल कोर्स शुरू किए जाएंगे। सभी विभागों के सिलेबस को समय की मांग के अनुसार परिवर्तित किया जाएगा। शिक्षक और अन्य मामलों में छात्रों, अभिभावकों और सुमदायों से फीडबैक लिया जाएगा। जेंडर सेंसिटिविटी, छात्र ग्रीवांस सेल और एंटी रैगिंग कमेटी को मजबूत किया जाएगा। कुलपति प्रोफेसर अनिल शुक्ल ने कहा कि इन सारे बिंदुओं पर विश्वविद्यालय ने काम कर लिया तो अगले नैक मूल्यांकन में ए ग्रेड हासिल करने की राह आसान हो जाएगी। बैठक में कुलसचिव एके अरविंद, कोआर्डिनेटर प्रोफेसर बीआर कुकरेती, परीक्षा नियंत्रक संजीव सिंह, प्रोफेसर एनएन पांडेय आदि मौजूद रहे।