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सोशल मीडिया पर पुलिस की तीसरी आंख बनेंगे डिजिटल वालंटियर

Tue, 25 Sep 2018 11:41 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
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सोशल मीडिया पर फर्जी अफवाह फैलाकर कुछ खुराफाती माहौल खराब करते हैं। इनकी नापाक कोशिशें नाकाम करने के लिए पुलिस अब डिजिटल वालंटियर का सहारा लेगी। सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर ये वालंटियर पुलिस के लिए तीसरी आंख का काम करेंगे। इसमें विश्वविद्यालय और कॉलेज के छात्रनेता, प्राचार्य, शिक्षकों के साथ समाज के अन्य वर्गों के लोग जोड़े जाएंगे। सोशल मीडिया पर कोई भी ऐसी गतिविधि जिससे माहौल खराब हो सकता हो, उससे पुलिस को आगाह करेंगे। पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश की तरफ से विश्वविद्यालय को पत्र भेजा गया है।
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पुलिस महानिदेशक ने इसे लेकर पहल की है। सभी 1469 थानों पर व्हाट्सऐप ग्रुप के माध्यम से 250 डिजिटल वालंटियर ग्रुप बनाए जाएंगे। प्रत्येक थाने के व्हाट्सऐप ग्रुप को जनपदीय ग्रुप से जोड़ा जाएगा। सभी जिलों के ग्रुप पुलिस महानिदेशक मुख्यालय से जोड़े जाएंगे। डिजिटल वालंटियर क्षेत्र में होने वाली तमाम घटनाओं, सोशल मीडिया पर शेयर होेने वाले मेसेज की जानकारी रखेंगे। क्षेत्र में होने वाले अपराध, मेले त्योहार पर क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था, घटना की सूचना सौ नंबर पर देंगे, अगर कोई संदिग्ध व्यक्ति दिखा तो उसकी सूचना, अगर सोशल मीडिया पर भड़काने वाला मेसेज चल रहा है तो लोगों को उसके प्रति जागरूक करने में अपनी भूमिका निभाएंगे। फेसबुक, व्हाट्सऐप, यूट्यूब पर भी सक्रिय रहेंगे। इसके अलावा कॉलेजों के आसपास की दुकानों पर बैठने वाले अनावश्यक लोगों की जानकारी देंगे। यहां तक गांव में होने वाले आपसी विवाद की भी जानकारी साझा करेंगे।

ये लोग बन सकते हैं डिजिटल वालंटियर
- छात्रनेता, शिक्षक, प्रधानाचार्य, पुलिस पेंशनर्स, पूर्व और वर्तमान सभासद, एएनएम, वकील, क्षेत्र के पत्रकार, पूर्व और वर्तमान ग्राम प्रधान, आशा वर्कर, कोटेदार, प्रमुख व्यापारी, सिविल डिफेंस, सेवानिवृत्त सैनिक, सामाजिक संगठन, पूर्व और वर्तमान बीडीसी सदस्य, ग्राम सचिव, डॉक्टर, पुजारी और इमाम, क्षेत्र के होमगार्ड।
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