बड़ा बाईपास के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) को जमीन देने वाले करीब छह सौ किसानों की मुआवजे की लड़ाई खत्म नहीं हो रही। किसानों के 12 जून को बड़ा बाईपास जाम करने की योजना को देखते रविवार को कलेक्ट्रेट सभागार में डीएम ने किसानों से वार्ता कर उन्हें आश्वस्त किया कि वह इस मामले को जल्द से जल्द निस्तारित करने के लिए शासन में खुद की पैरवी करेंगे। इसके बाद किसानों ने अपना प्रस्तावित प्रदर्शन दस दिन के लिए टाल दिया है।
बड़ा बाईपास मामले को लेकर शनिवार को एडीएम ने किसानों के साथ बैठक की। लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। इसके बाद रविवार को डीएम ने किसानों से वार्ता की। किसानों की तरफ से अगुवाई कर रहे अखिल भारतीय किसान महासभा के अध्यक्ष हरिनंदन सिंह ने एक बार फिर यह मामला उठाया कि एनएचएआई को जमीन देने वाले किसानों को मुआवजा देने के नाम पर करोड़ों रुपये की धांधली की गई है। मुआवजे को लेकर शासन में फाइल लंबित है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। पांच साल से मुआवजा की लड़ाई लड़ रहे करीब छह सौ किसानों की सुनवाई नहीं हो रही। मीटिंग में डीएम ने किसानों को यह दिलासा दिया कि वह धैर्य बनाए रखे। किसानों को उचित मुआवजा दिलाने के लिए वह खुद ही शासन में पैरवी करेंगे। किसानों ने प्रशासन को दस दिन का वक्त देते हुए सोमवार को प्रस्तावित आंदोलन का समाप्त कर दिया है।
यह है मामला
दिल्ली-शाहजहांपुर हाईवे को जोड़ने वाले बड़ा बाईपास निर्माण के लिए वर्ष 2013 में परसाखेड़ा से रजऊ परसपुर के बीच 2390 किसानों की करीब 2018 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया था। इसमें छह सौ किसानों ने इस बात का विरोध किया कि उनके सर्किल रेट से काफी कम दर पर मुआवजा दिया जा रहा है। इसके बाद से ही इन किसानों की मुआवजे को लेकर लड़ाई चल रही है। न्याय मिलने की आस में ही करीब 30 किसानों की मौत हो चुकी है। मामला निचली अदालत में भी कई वर्षों से विचाराधीन है। अब किसान मामले को कोर्ट के बाहर हल करना चाहते हैं।