कर्ज माफी के लिए शासन ने 15 अप्रैल तक समय सीमा भले बढ़ा दी हो, लेकिन हजारों किसानों को इससे कोई राहत मिलती नहीं दिखाई दे रही है। दिक्कत यह आ रही है कि ऋणमोचन की अंतिम तिथि बढ़ाए जाने के बावजूद शासन ने पोर्टल खोलने में छह दिन का वक्त लगा दिया। इससे ऑनलाइन शिकायतों की जांच भी नहीं हो पा रही है। कृषि अधिकारियों के सामने सप्ताहभर में 15 हजार से ज्यादा शिकायतों की जांच कराने की फिर से चुनौती खड़ी है।
शासन ने ऋण मोचन योजना के लिए पहले 10 मार्च की अंतिम तिथि तय की थी लेकिन कृषि विभाग कर्ज माफी न पाने वाले 15 हजार किसानों की ऑनलाइन शिकायतों की जांच ही नहीं करा सका। इससे इन किसानों को इस योजना का लाभ भी नहीं मिला। इसके साथ ही कृषि विभाग के कार्यालय में ऑफ लाइन शिकायतें के भी अंबार लगे हैं। कर्ज माफी से वंचित रहने वाले किसानों को एक और मौका देते हुए शासन ने 15 अप्रैल तक समय सीमा बढ़ा दी है। इसके बावजूद किसानों को राहत मिलनी नहीं दिखाई दे रही है। सरकार ने समय सीमा बढ़ाने का आदेश तो पहली अप्रैल को जारी कर दिया लेकिन ऑनलाइन पोर्टल छह अप्रैल की शाम को खुल सका। इस देरी से किसानों की ऑनलाइन शिकायतों के मामले जांच के लिए संबंधित एसडीएम को नहीं भेजे जा सके है। इस हीलाहवाली में काफी वक्त निकल चुका है। अब बढ़ी हुई तिथि के लिए एक हफ्ता ही बाकी रहा है। इतने कम समय में 15 हजार शिकायतों के निस्तारित होने की संभावना नहीं दिख रही। आखिर में सिस्टम की खामी का खामियाजा एक बार फिर किसानों को ही भुगतना होगा।
ऋण मोचन के लिए पोर्टल खुलने में काफी विलंब हुआ है। हालांकि शनिवार को पोर्टल चालू हो जाने के बाद कोशिश की जा रही है कि किसानों की बाकी रहीं ऑनलाइन शिकायतों की जांच जल्द से जल्द करा ली जाए। - आरटी यादव, जिला कृषि अधिकारी