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Bareilly News: 792 तारीखें, 3.96 लाख खर्च... फैसला अब भी बाकी

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बरेली। जिले में राजस्व न्यायालयों में वाद निस्तारण की अच्छी रैंकिंग के बावजूद फरियादी लंबे समय से न्याय के लिए भटक रहे हैं। कई मामले 22 साल से लंबित हैं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भरतौल के एक फरियादी को तो 22 साल में 792 तारीखें मिलीं और 3.96 लाख रुपये खर्च हो गए, पर फैसला अब भी बाकी है।
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राजस्व न्यायालयों में नामांतरण, फर्जी तरीके से जमीन बेचने, भूमि कब्जा करने और रास्ते के विवाद जैसे मामले वर्षों से लंबित हैं। छोटे मामलों में भी दो से तीन साल बीत जाते हैं। हर बार तारीख मिलने से वादकारियों का आर्थिक और मानसिक शोषण हो रहा है। धौरा टांडा निवासी देवकी नंदन ने बताया कि उनके दादा की भूमि पर फर्जी तरीके से नाम दर्ज करा लिया गया। एसडीएम कोर्ट में तीन साल से सुनवाई चल रही है, जिसमें हर महीने चार से पांच तारीखें लगती हैं। इस पर उन्हें 800 से 1500 रुपये खर्च करने पड़ते हैं, फिर भी सुनवाई पूरी नहीं हुई है।
पुरापुर निवासी बाबूद्दीन ने बताया कि तीन साल पहले उन्होंने अपनी भूमि का दाखिल खारिज कराया था। इसमें उनके बेटों का नाम भी चढ़ गया था। एक साल पहले संशोधन रद्द कर दिया गया। नायब तहसीलदार रिठौरा कोर्ट में सुनवाई जारी है। वादकारी आर्थिक और मानसिक शोषण झेलते हुए फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
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केस एक :-22 साल से सुनवाई, लगी 792 तारीखें व खर्च किए चार लाख :-



सदर तहसील के तजुआ निवासी रामचंद्र का मामला एसडीएम कोर्ट में 22 साल से चल रहा है। इनको चाचा ने वसीयत की थी। भूमि पर विपक्षी का नाम नहीं था फिर भी सामने वाले ने भूमि बेच डाली। 10 बीघा भूमि के मामले को लेकर 2004 से मामला एसडीएम कोर्ट में चल रहा है। पेशे से मजदूरी व खेती करते हैं, ऐसे में अब तक हर आठ से 10 दिन पर तारीख लगती है। हर तारीख पर 500 रुपये खर्च होते हैं। अब तक 792 तारीखों पर 3.96 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं।



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16 सालों में 816 तारीखें व खर्च हुए 3.84 लाख



केस दो :-सदर तहसील के भरतौल निवासी कालीचरण कन्नौजिया ने बताया कि बैहबा बिथरी में 15.50 बीघा भूमि का मामला एसडीएम कोर्ट में चल रहा है। इसमें दाखिल खारिज भी हो गया है। इसमें विपक्षी ने तीन बीघा जमीन कब्जा कर लिया है। अब तक एसडीएम, तहसीलदार, कमिश्नर कोर्ट में फैसला इनके पक्ष में दे दिया है। अब पुनः विपक्षी की तरफ से आपत्ति कर दी गई है। प्रति तारीख पर 500 रुपये खर्च हो चुके हैं। इस पर अब तक 16 सालों में 816 तारीखें पड़ चुकी हैं, जबकि 3.84 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं।



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12 साल में लगी 576 तारीख, खर्च हुए 2.88 लाख :-



केस तीन :-गोपालापुर अजीजपुर निवासी शिव कुमार ने बताया कि मेरी मां की भूमि मायके में है। इसमें मां के ताऊ के लड़के जमीन पर कब्जा कर रहे हैं। राजस्व मामले की सुनवाई 2014 से नायब तहसीलदार, भोजीपुरा, एसडीएम कोर्ट में क्रमश: चल रही है। महीने में चार तारीखें लग रही हैं और हर बार 500 रुपये वकील व आने-जाने पर खर्च हो रहे हैं। खेती करने के चलते आय का कोई स्रोत नहीं है। 12 साल में अब तक 576 तारीखें लग चुकी हैं, इस पर 2.88 लाख रुपये भी खर्च हो चुके हैं।
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वर्जन ...
हमारे यहां लंबे समय से कोई भी मामले लंबित नहीं हैं। फिर भी अगर वादकारियों की तरफ से बताया जा रहा है तो उनकी फाइल निकलवाकर देखा जाएगा। फिर उनको देखने के बाद असलियत सामने आ जाएगी। -अविनाश सिंह, जिलाधिकारी
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