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Bareilly News: स्नातक में 79,129 सीटें खाली, एक लाख से अधिक हुए पंजीकरण

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बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने स्नातक पाठ्यक्रम में पंजीकरण के लिए पोर्टल बंद कर दिया है। बुधवार शाम तक दो लाख सीटों के लिए 1,20,871 विद्यार्थियों ने आवेदन किया। इसमें सबसे अधिक आवेदन प्रमुख कॉलेजों में बीए प्रथम सेमेस्टर के लिए हुए हैं। जबकि अन्य पाठ्यक्रमों में सीटों के सापेक्ष भी पंजीकरण नहीं हो सके हैं।
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विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर नौ जून से 10 जुलाई तक स्नातक के लिए पंजीकरण किए जा रहे थे। अंतिम दिन करीब 800 विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया। इसके बाद भी विवि की 79,129 सीटें रिक्त हैं। वहीं, कॉलेजों में बीए के बाद बीएससी (प्राणी समूह) में अधिक आवेदन आए हैं। सबसे खराब स्थिति बीएससी गणित समूह की रही। जहां सीटों के समान भी पंजीकरण नहीं हो सके। कई पाठ्यक्रमों में खाता तक नहीं खुला है। मुख्य प्रवेश समन्वयक प्रो. एसके पांडेय के अनुसार बुधवार शाम तक 1,20,871 पंजीकरण हो चुके हैं।

प्रमुख कॉलेजों में आवेदन की स्थिति
विवि से संबद्ध प्रमुख कॉलेजों में से बरेली कॉलेज में बीए में सबसे अधिक 1840 सीटों के सापेक्ष 3706, बीएससी (प्राणी समूह) में 720 के सापेक्ष 2143, बीएससी (गणित समूह) में 880 के सापेक्ष 749 आवेदन हो चुके हैं। हिंदू कॉलेज मुरादाबाद में बीए की 1440 सीटों के सापेक्ष 1780, बीएससी (प्राणी समूह) में 560 के सापेक्ष 962, बीएससी (गणित) में 960 सीटों के सापेक्ष 345 और बीकॉम में 960 सीटों के सापेक्ष 920 पंजीकरण हुए हैं। केजीके मुरादाबाद में बीए की 1100 सीटों पर 775, बीकॉम में 240 सीटों पर 82, बीएससी (गणित) में 640 सीटों पर 79 और बीएससी (जूलॉजी, बॉटनी व रसायन विज्ञान) की 240 सीटों पर 149 आवेदन आए हैं। शाहजहांपुर के जीएफ कॉलेज में बीए की 2,000 सीटों पर 1600, बीएससी (गणित और प्राणी समूह) की 1280 सीटों पर 970 और बीकॉम की 120 सीटों पर 200 आवेदन आए हैं। वहीं एसएस कॉलेज शाहजहांपुर में बीए की 1320 सीटों पर 1650, बीएससी की 480 सीटों पर 950 और बीकॉम की 620 सीटों पर 449 विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया है।
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प्रोफेशनल कोर्स की ओर बढ़ रहे युवा

विशेषज्ञ व बरेली कॉलेज के पूर्व कार्यवाहक प्रचार्य डॉ. अजय कुमार शर्मा ने बताया कि बीए, बीएससी या बीकॉम युवाओं को रोजगारपरक नहीं लग रहे हैं। ऐसे में वे प्रोफेशनल कोर्सों की ओर बढ़ रहे हैं। सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों में अधिक फीस लेकर रोजगारपरक तकनीकी कोर्स और डिप्लोमा कराए जा रहे हैं। जो कि आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों की पहुंच से दूर है। सरकारी कॉलेजों में संचालित डिप्लोमा कोर्सों में निजी महाविद्यालयों की तरह सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं, क्योंकि वहां फीस भी कम है। इसलिए भी ये पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को नहीं लुभा पाते हैं। स्नातक में कम पंजीकरण का एक प्रमुख कारण यह है कि इंटरमीडिएट के बाद ही युवा अपनी या परिवार की जरूरत को पूरा करने के लिए प्राइवेट जॉब कर रहे हैं। इसलिए वे व्यक्तिगत फॉर्म के माध्यम से पढ़ाई जारी रखते हैं। संवाद
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