बरेली। एसटीएफ टीम ने नारकोटिक्स विभाग के सहयोग से करीब 78 किलो चरस के साथ रामपुर के दो लोगों को गिरफ्तार किया है। दोनों उत्तराखंड नंबर की बोलेरो में नेपाल से चरस की खेप लेकर रामपुर जा रहे थे। भोजीपुरा में बिलवा पुल के पास उनकी गिरफ्तारी हुई। इस चरस की कीमत करीब एक करोड़ रुपये बताई जा रही है। नारकोटिक्स सेल ने दोनों को न्यायालय में पेश करके जेल भिजवा दिया है। इससे पहले भी नशे के सौदागरों का रुहेलखंड में जाल पकड़ा गया है। लखनऊ एसटीएफ के दरोगा विनय दिवाकर के नेतृत्व में एक टीम कई दिनों से बरेली में मादक पदार्थों के तस्करों के पीछे लगी थी। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि नेपाल से कुछ तस्कर चरस की खेप लेकर आ रहे हैं। इसके बाद नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने बिलवा मोड़ पर घेराबंदी कर दी। शुक्रवार शाम साढ़े सात बजे उत्तराखंड नंबर की संदिग्ध बोलेरो जैसे ही यहां पहुंची संयुक्त टीम ने उसे रोक लिया। पुलिस को देखकर गाड़ी में सवार दोनों तस्करों मोहम्मद आदिल पुत्र स्वर्गीय घसीटा निवासी मोहल्ला चक थाना-स्वार (रामपुर) और रामपुर के ही मोहल्ला पक्का बाग, थाना-गंज निवासी मोहम्मद जावेद पुत्र स्वर्गीय शरीफ ने भागने की कोशिश की। इन्हें दौड़ाकर पकड़ लिया गया। इसके बाद बोलेरो की तलाशी ली गई तो फर्श के नीचे बनाई गई जगह में चरस मिली। पूछताछ में जावेद ने आदिल को बोलेरो का मालिक और खुद को चालक बताया। आदिल ने बताया कि चरस की सप्लाई जावेद पुत्र नब्बू को रामपुर में देनी थी। बरामद 78 किलो 300 ग्राम चरस की कीमत करीब एक करोड़ रुपये बताई जा रही है। अभियुक्तों के पास से 2540 रुपये भी बरामद हुए हैं।
एक खेप के मिलते हैं 60 हजार रुपये
आदिल ने बताया कि एक खेप पहुंचाने के लिए उन्हें 60 हजार रुपये मिलते हैं। जावेद रामपुर शहर के बाहर ही उनसे डिलीवरी लेता है। दोनों आरोपियों के खिलाफ धारा 8/20 एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
मादक पदार्थों की तस्करी का गढ़ बन रहा रामपुर
बरेली। रामपुर पशु तस्करी के अलावा मादक पदार्थों की तस्करी का भी गढ़ बनता जा रहा है। पिछले दिनों एसटीएफ ने बहेड़ी में चरस से साथ जिन लोगों को पकड़ा था, उन्होंने रामपुर के मुख्तर खां को सप्लाई देने की बात कही थी। शुक्रवार शाम पकड़े गए आदिल और जावेद भी डिलीवरी देने रामपुर ही जा रहे थे।
एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक, जावेद और मुख्तर रामपुर के बड़े तस्कर हैं। खटीमा का रतन उन्हें नेपाल से खरीदकर चरस भेजता है। रामपुर से चरस की खेप मुरादाबाद, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और पंजाब तक जाती है। एसटीएफ मादक पदार्थों की तस्करी करने वालों को पकड़ने के लिए करीब दो महीने से लगी थी। पंद्रह दिन पहले टीम को दो दिन यहां रहने के बाद तब बैरंग लौटना पड़ा था, जब तस्करों ने डिलीवरी कैंसिल कर दी थी। आदिल और जावेद का जैसे ही नेपाल जाने का कार्यक्रम बना एसटीएफ अलर्ट हो गई। दोनों चरस लेकर बरेली में दाखिल होने ही वाले थे कि उन्हें बिलवा मोड़ पर पकड़ लिया गया।