बरेली। पूरा शहर जानता है कि शहामतगंज में मार्केट लगती है। यहां सुबह नौ बजे से रात 10 बजे तक इतनी भीड़ रहती है कि हर आधे घंटे में जाम लगता है, लेकिन बीडीए के मास्टर प्लान में यह इलाका भी रिहायशी है। बीडीए ने शहर के अंदर जिन व्यवसायिक जमीनों को चिह्नित किया है, उनमें शहामतगंज मार्केट का नाम शामिल नहीं है।
अमर उजाला ने शहामतगंज फल मंडी से लेकर साहू रामस्वरूप कॉलेज तक की स्थिति का जायजा लिया। शहामतगंज फल मंडी में छोटे-बड़े करीब डेढ़ सौ ठेले और खोखे फलों के लगते हैं। फल मंडी से नीचे उतरने पर सड़क के दोनों तीन से चार मंजिला बिल्डिंग हैं। इनके नीचे कहीं बड़ी तो कहीं छोटी दुकानें हैं। सड़क के एक ओर सबसे पहले पेंट की दुकान हैं। फिर जरनल स्टोर की कई दुकानें हैं। उनके आगे किताबों की थोक और फुटकर दुकानें खुली हैं। थोड़ी दूर चलने पर धार्मिक सामग्री खरीद बिक्री की छोटी दुकान है। ऊपर भोजनालय खुला है। रोड के दूसरी ओर शुरूआती चार या पांच दुकानें जरनल स्टोर या रोजमर्रा सामान की हैं। मेडिकल स्टोर, उसके आगे बताशे की दुकान और फिर होटल। शहदाना रोड के नीचे उतरते ही रोड के दोनों ओर दुकानों के बीच में रिक्शों, ठेलों के अलावा चाट आदि के ठेलों का जमावड़ा रहता है। रोजाना यह लाइन इतनी लंबी लगती है कि आखिर में होटल तक जाकर खत्म होती है। रिक्शों और ठेलों की वजह से पूरा मार्केट सुबह नौ बजे से रात 10 बजे रोजाना जाम रहता है। यहां से हर समय निकलना मुश्किलों भरा होता है।
अब बात मार्केट की। शहदाना रोड से नीचे उतरते ही घनी दुकानों का सिलसिला शुरू होता है। यहां दुकानदारों ने आगे घने आकार में दुकानें बना रखी हैं और उनके पीछे स्टोर हैं। रोड के दोनों ओर साहू रामस्वरूप डिग्री कालेज से पहले तक कम से 250 से अधिक जरनल स्टोर की दुकानें हैं। इनका सामान सड़क तक फैला रहता है। दुकानों के पीछे सरसों तेल, रिफाइंड, आटा, चावलों के गोदाम हैं। 15 से 20 कारखाने इसी इलाके में हैं। आटा चक्की से लेकर पॉम ऑयल तक के मिनी स्टोर इसी इलाके में हैं। मिर्च मसालों का कारोबार भी इसी सड़क के दोनों ओर खुली दुकानों में होता है। अधिकांश इमारतों के बीडीए से या तो नक्शे स्वीकृत नहीं हैं या फिर आवासीय नक्शे मंजूर कराकर कारखाने चलाए जा रहे हैं या आवासीय भवनों के गोदाम बनाकर उनमें व्यापार हो रहा है। आगे चलकर सड़क के दोनों ओर छोटी-छोटी दुकानों में होटल खुले हैं। होटल से किनारे वाली गली होली चौराहे पर जाकर निकलती है। इस गली में भी दुकानें बनी हैं, जिनमें अधिकांश होटल ही खुले हैं। इसके आगे चलने पर राष्ट्रीयकृत और प्राइवेट के एटीएम लगे हैं। बीच में कम से कम एक दर्जन से ज्यादा बने ऊंचे भवनों में किसी न किसी चीज का गोदाम है। साहू रामस्वरूप कॉलेज से पहले एक राष्ट्रीयकृत बैंक और उसका एटीएम है। मतलब, यह पूरा रोड ही कामर्शियल है, लेकिन बीडीए इसको आवासीय मानता है।