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दसवीं में 75 फीसदी से कम मार्क्स हैं तो बच्चे की टीसी ले जाओ

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बरेली। एक तरफ शिक्षाविद् और मनोविज्ञानी बच्चों पर अच्छे नंबरों का प्रेशर खत्म करने की बात कह रहे हैं और दूसरी तरफ कैंट के एक कॉन्वेंट स्कूल ने हाल ही में रिजल्ट घोषित होने के बाद उन बच्चों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है, जिनके 75 प्रतिशत से कम मार्क्स आए हैं। काफी मिन्नतों के बाद भी स्कूल प्रबंधन के अपनी जिद पर अड़े रहने पर अब अभिभावकों ने आईसीएसई बोर्ड में शिकायत दर्ज कराने का फैसला लिया है।
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सात मई को आईसीएसई यानी 10वीं का परीक्षा परिणाम घोषित हुआ था जिसमें सेंट मारिया गौरेटी स्कूल के 34 विद्यार्थियों के मार्क्स 75 फीसदी से कम रह गए थे। कम मार्क्स की वजह से इन बच्चों के चेहरे पहले ही मुरझाए हुए थे, अब स्कूल प्रबंधन ने उन्हें 11वीं में प्रवेश देने से इंकार करके और तगड़ा झटका दे दिया है। स्कूल के फैसले से स्तब्ध अभिभावकों ने प्रिंसिपल को समझाने की कोशिश की तो उन्होंने गाइडलाइंस का हवाला देते हुए 75 फीसदी से कम मार्क्स लाने वाले बच्चों का एडमिशन किसी हालत में न लेने की बात कह दी। पेरेंट्स का आरोप है कि उनके बच्चों के मैथ्स में कम मार्क्स थे, लिहाजा उन्होंने उनके लिए कॉमर्स में एडमिशन मांगा लेकिन इसके लिए भी प्रिंसिपल तैयार नहीं हुईं और बच्चों को आर्ट सब्जेक्ट पढ़ाने का सुझाव दे दिया।
पेरेंट्स का कहना है कि पहले प्रिंसिपल ने कम मार्क्स के कारण एडमिशन देने से इंकार किया लेकिन शनिवार को जब वे दोबारा पहुंचे तो उन्होंने सीटें फुल होने की बात कह दी। उन्होंने इस पर आपत्ति जताई तो टीसी ले जाने को कह दिया गया। पेरेंट्स का कहना है कि उनके बच्चे शुरू से इसी स्कूल में पढ़े हैं। कम मार्क्स आए हैं तो इसके जिम्मेदार सिर्फ बच्चे नहीं बल्कि स्कूल की शिक्षा व्यवस्था भी है। बच्चे कमजोर थे तो उन्हें पहले ही बता देना चाहिए था ताकि वे कहीं और एडमिशन करा देते। अब उनके बच्चों का कहीं और भी एडमिशन होना मुश्किल है।
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‘बच्चे कोई गलत कदम न उठा लें’
10वीं की छात्रा जयति, खुशी, आयशा के क्रमश: 69, 66, 58 फीसदी मार्क्स हैं। इनके पेरेंट्स ने बताया कि कम मार्क्स आने के कारण बच्चे पहले ही परेशान थे, अब एडमिशन से इंकार किए जाने के बाद वे हताश हो गए हैं। दिन भर गुमसुम बैठे रहते हैं। परिवार में किसी से बात नहीं कर रहे हैं और अचानक उनसे लिपटकर रो पड़ते हैं। उन्हें डर लग रहा है कि बच्चे कोई गलत कदम न उठा लें।

पेरेंट्स गलत आरोप लगा रहे हैं। हमने बच्चों को कमजोर नहीं कहा बल्कि उन्हें क्षमता के अनुसार बेहतर विकल्प चुनने का सुझाव दिया है। अब तो सीटें भर चुकी हैं इसलिए एडमिशन करना भी मुश्किल है। - सिस्टर अल्फोंसा, प्रिंसिपल
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