बरेली। शहर के एक प्रमुख बिल्डर ने करीब दो हजार वर्ग मीटर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया। जब मामला कोर्ट पहुंचा तो बिल्डर ने अदालत को बताया कि वाटर टैंक तूफान में ध्वस्त हो गया। उसकी मरम्मत बहुत जरूरी है। लिहाजा अदालत सुनिश्चित करे कि जनहित में बीडीए वाटर टैंक के निर्माण में हस्तक्षेप न करे।
पीलीभीत बाईपास स्थित एक कालोनी में लगभग दो हजार वर्ग मीटर जमीन पर बिल्डर ने झूठे तथ्य रखते हुए न्यायालय से स्टे ले लिया। बताया कि वहां एक वाटर टैंक बना था जो एक साल पहले आंधी तूफान में ध्वस्त हो गया। वह उसकी मरम्मत कराना चाहता है। प्राकृतिक आपदा में नष्ट भवन की मरम्मत को बीडीए की अनुमति जरूरी नहीं है। कोर्ट ने बिल्डर को स्टे देकर बीडीए का हस्तक्षेप निषेध कर दिया। बिल्डर ने दो पार्टनर्स के साथ मिलकर जमीन पर कब्जा कर लिया और अब उस पर ऑफिस बनाकर होटल बना रहा है। बीडीए स्टाफ कोर्ट में सही तथ्य रखकर स्टे खारिज कराने के बजाय आपत्तिकर्ताओं को कोर्ट का स्टे आदेश बताकर बिल्डर को अवैध तरीके से होटल निर्माण की छूट दिए हुए है।