बरेली। शिक्षकाें की कम संख्या के चलते रुहेलखंड विश्वविद्यालय में मूल्यांकन कार्य पहले दिन से ही रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन के कहने के बावजूद प्रोफेसर इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। उनका कहना है कि परीक्षा कराएं या मूल्यांकन करें। इस वजह से विश्वविद्यालय ने महाविद्यालयों से संपर्क कर शिक्षकों की संख्या बढ़ाने को कहा है ताकि समय पर परीक्षा परिणाम घोषित किया जा सके।
होली के अवकाश के बाद 26 मार्च से विश्वविद्यालय में मुख्य परीक्षा की कॉपियां जांचने का काम शुरू कर दिया गया है, मगर अभी परीक्षाएं खत्म नहीं हुई हैं। इस वजह से महाविद्यालयों के पास मूल्यांकन के साथ ही परीक्षा कराने की भी जिम्मेदारी है। इस वजह से मूल्यांकन में काफी कम प्रोफेसर पहुंच रहे हैं। मूल्यांकन कार्य भी रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है। ऐसे में समय पर परीक्षा परिणाम घोषित कराने की शासन की मंशा पर पानी फिरता नजर आ रहा है। इस वजह से विश्वविद्यालय ने महाविद्यालयों के प्राचार्य और प्रोफेसरों से संपर्क किया है। प्राचार्यों से कहा है कि मूल्यांकन के लिए अधिक से अधिक प्रोफेसरों को भेजें ताकि परीक्षा परिणाम समय पर जारी हो सके।
मूल्यांकन शुल्क बढ़ाने का भी फायदा नहीं
प्रोफेसरों को मूल्यांकन कार्य की ओर आकर्षित करने के लिए इस बार मूल्यांकन शुल्क में भी बढ़ोतरी की गई है। ग्रेजुएशन के लिए यह शुल्क 15 से बढ़ाकर 20 रुपये और पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए 20 से 25 रुपये कर दिया गया है, मगर इसका भी कोई असर नजर नहीं आ रहा है।
मूल्यांकन के लिए कम प्रोफेसर आ रहे हैं, प्रोफसरों और महाविद्यालयों से संपर्क कर संख्या बढ़ाने के लिए कहा जा रहा है। हमारा प्रयास है कि समय पर परीक्षा परिणाम जारी किया जा सके। - संजीव कुमार सिंह, परीक्षा नियंत्रक