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स्वच्छ भारत मिशनः पांच साल बाद छूटे लाभार्थियों के खातों में भेजी रकम

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बरेली। गरीबों को टॉयलेट बनाने की रकम देने के लिए वर्ष 2012 की लिस्ट में करीब 54 हजार लोग शामिल होने से रह गए थे। अब इन लाभार्थियों को चिह्नित करने के बाद उनके खातों में करीब 25 करोड़ रुपये जारी कर दिए गए हैं। 15 जनवरी से इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए जोरशोर से अभियान चलाया जाना है। इसके लिए सीडीओ सत्येंद्र कुमार ने विकास भवन में बीडीओ के साथ मीटिंग कर इसकी कार्ययोजना भी तैयार कर ली है।
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स्वच्छ भारत मिशन के तहत वर्ष 2012 में पंचायती राज विभाग ने सर्वे कराया था, उसमें जिलेभर में 2.55 लाख परिवार चिह्नित हुए थे। शासन ने इस सूची को मंजूरी दे दी लेकिन बाद में यह सामने आया है कि इस लिस्ट में हजारों लोगों के नाम ही शामिल होने से रह गए हैं। इस वजह से उन्हें अब तक शौचालय बनाने के लिए मिलने वाली 12 हजार की रकम भी नहीं मिल सकी है। पिछले साल यह लक्ष्य पूरा होने के बाद सीडीओ ने पूर्व में बनी सूची में छूटे हुए परिवारों को सरकारी रकम दिलाने के लिए फिर से सर्वे कराया तो इसमें अब 54495 लाभार्थियों की सूची तैयार हुई है। डीपीआरओ के पास इनके लिए करीब 25 करोड़ की धनराशि मिली थी। इससे शौचालय बनाने के लिए पहली किस्त के तौर पर छह-छह हजार की रकम करीब 40 हजार लोगों के खातों में ट्रांसफर की जा चुकी है। कोशिश चल रही है कि इस साल के अंत तक इस टारगेट को पूरा कर लिया जाए। इसके लिए सभी बीडीओ के साथ इस अभियान से जुड़े स्टाफ को गाइड लाइंस भी जारी कर दी गई है।

जीओ टैगिंग न होने से सैकड़ों लाभार्थियों की नहीं हो सकी चेकिंग
पंचायत राज विभाग ने 2.55 लाख शौचालयों में अब तक करीब 88 फीसदी टॉयलेट की जियो टैगिंग नहीं करा सका है। ऐसे में उनका ब्योरा भी वेबसाइट पर अपलोड नहीं हो पा रहा है। साथ ही उसकी क्रास चेकिंग कराने में भी दिक्कत आ रही है। इस संबंध में बताया जा रहा है कि ये वे लाभार्थी बाकी रह गए हैं, जिनके खाते या तो गलत थे या एनपीए या अन्य वजह से निष्क्रिय थे। ऐसे में इन्हें शौचालय की धनराशि भेजने में काफी देरी हुई।
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‘स्वच्छ भारत मिशन में छूटे लाभार्थियों का सर्वे कराकर उन्हें टॉयलेट की धनराशि भेजी जा रही है। इसके लिए खास तौर से मुहिम चलाने की तैयारी है। इसके लिए बीडीओ के साथ ही वार्ता हो गई है।’
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- सत्येंद्र कुमार, सीडीओ
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