बरेली। सेना की फायरिंग रेंज में सुरंगनुमा कई गड्ढे खोदे जाने के मामले की दो दिन से जांच कर रही आर्मी इंटेलिजेंस ने इसे खनन का मामला मानने से साफ इंकार कर दिया है। इनके पीछे किसी साजिश की आशंका जताते हुए अपनी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी है। सूत्रों के मुताबिक इन गड्ढों को आतंकी ठिकानों जैसा माना गया है।
इससे पहले आर्मी इंटेलिजेंस की टीम ने बृहस्पतिवार को रक्षा संपदा अधिकारी से मिलकर फायरिंग रेंज से सरकंडों की तस्करी किए जाने के बारे में भी जानकारी ली। सैन्य सूत्रों के मुताबिक अब शुक्रवार से इस मामले में आसपास के गांवों में सघन छानबीन शुरू की जाएगी।
फायरिंग रेंज में सुरंगनुमा गड्ढे बनाए जाने का खुलासा तब हुआ था जब यहां से सरकंडों की तस्करी किए जाने की सूचना पर रक्षा संपदा अधिकारी 24 दिसंबर को छापा मारने पहुंचे थे। पांच लोगों को पकड़ने के बाद जब फायरिंग रेंज का मुआयना किया गया तो यहां दर्जन भर से ज्यादा सुरंगनुमा गड्ढों को देखकर मौके पर पहुंचे सैन्य अधिकारी सकते में आ गए थे। ऊपर से जांच का आदेश आने के बाद इस मामले में आर्मी इंटेलिजेंस को लगा दिया गया। सोमवार से ही टीम छानबीन में जुटी हुई है। बृहस्पतिवार को भी शाम करीब साढ़े तीन बजे टीम फायरिंग रेंज का निरीक्षण करने पहुंची। सुरंगनुमा गड्ढों की लंबाई का आकलन करने के बाद उसके अंदर उतरकर वहां हथियार जैसा सामान रखे जाने की संभावना जांची। यह भी देखा कि उन्हें कहां तक खोदा गया है।
इसके साथ इंटेलिजेंस ने अपनी रिपोर्ट भी उच्चाधिकारियों को भेज दी है। इसमें गड्ढों का मकसद खनन मानने से इंकार करते हुए साजिश की आशंका जताई गई है। बता दें कि सैन्य अधिकारी अभी तक इसे खनन का मामला ही बताते रहे हैं, लेकिन इंटेलिजेंस की टीम उनके दावे से सहमत नहीं है। इंटेलिजेंस की जांच अभी जारी रहेगी।
सेना पर उठा सवाल.. पकड़े लोगों को छोड़ने से कहीं अहम सुराग हाथ न निकल जाएं
फायरिंग रेंज से सरकंडों की तस्करी कई साल से चल रही थी। तस्करी करते हुए पांच लोगों को सेना पुलिस के सुपुर्द किया गया था, लेकिन इन लोगों को दो दिन हिरासत में रखे जाने के बाद मंगलवार देर रात छोड़ दिया गया। उनके खिलाफ कोई मामला भी दर्ज नहीं किया गया। आर्मी इंटेलिजेंस ने सेना की इस कार्रवाई से ‘अहम सुराग’ हाथ से निकल जाने की आशंका जताई है। सेना पुलिस और पुलिस के इस निर्णय पर सवालिया निशान लगाते हुए गोपनीय जांच भी शुरू की है। इंटेलिजेंस इसके साथ आसपास के ग्रामीणों से भी पूछताछ कर सकती है ताकि गड्ढे खोदने और सरकंडे की तस्करी करने वालों के आने-जाने के समय, उनके नाम-पते आदि सवालों की जानकारी मिल सके।
विजिलेंस टीम कार्यालय में आकर संबंधित प्रकरण पर पूछताछ की है। तस्करी आदि से संबंधित जानकारियां दी गई हैं। मामले की सघन पड़ताल हो तो कई रहस्यों से पर्दा उठने की संभावना है। पकड़े गए लोगों को बगैर कानूनी कार्रवाई क्यों छोड़ा गया, इस पर पूछा जाएगा। - प्रमोद कुमार सिंह, रक्षा संपदा अधिकारी