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प्राइवेट परीक्षा फॉर्मः विवि की सेटिंग से निजी कॉलेज कर रहे जमकर कमाई

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बरेली। प्राइवेट परीक्षा फॉर्म के जरिये निजी कॉलेजों को फायदा पहुंचाने का पूरा इंतजाम किया गया है। एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने अंदरखाने राजकीय और अनुदानित कॉलेजों के फॉर्म कम कर दिए हैं। लिहाजा छात्र निजी कॉलेजों का विकल्प चुनने पर ही मजबूर हैं। निजी कॉलेजों में प्राइवेट फार्मों के अग्रसारण के नाम पर एक हजार रुपये तक वसूले जा रहे हैं। इधर, अनुदानित कॉलेजों का कहना है कि उनका कोटा पूरा होने से पहले ही फॉर्म नहीं भरे जा रहे है। बरेली कॉलेज में ही एमकॉम का कोटा पूरा होने से पहले ही फॉर्म भरना बंद हो गए हैं।
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प्राइवेट परीक्षा फॉर्म 13 जनवरी तक भरे जाएंगे। पांच सौ रुपये लेट फीस के साथ फार्म 20 जनवरी तक भरे जा सकते हैं। प्राइवेट परीक्षा फॉर्म राजकीय और अनुदानित कॉलेजों के साथ ही निजी कॉलेजों से भी भरे जा रहे हैं। अनुदानित कॉलेजों से फॉर्म न भर पाने के कारण छात्र मजबूरन निजी कॉलेजों का रुख कर रहे है, जहां उनसे अग्रसारण शुल्क के नाम पर एक हजार रुपये तक वसूले जा रहे हैं। सेटिंग का यह खेल विश्वविद्यालय तक फैला है। राजकीय और अनुदानित कॉलेजों में जितने फॉर्म कम होंगे प्राइवेट कॉलेजों में उतने ही बढ़ेंगे। बरेली कॉलेज में स्नातक और परास्नातक के हर साल 13 हजार से ज्यादा प्राइवेट फॉर्म भरे जाते हैं। एमकॉम के करीब ढाई हजार फॉर्म भरे जाते हैं। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि एमकॉम में अभी ढाई हजार फॉर्म नहीं भरे गए हैं, लेकिन फॉर्म भरना बंद हो गए हैं। छात्र कॉलेज में संपर्क कर रहे हैं। बाकी कोर्स में कितने फार्म भरे गए हैं, इसकी भी जानकारी नहीं है। विश्वविद्यालय ने पिछले साल ही प्राइवेट का कोटा बढ़ाने से मना कर दिया था। इस बार सीटें कम हुईं तो छात्रों को निजी कॉलेजों में ही भागना पड़ेगा। परीक्षा नियंत्रक संजीव कुमार का कहना है कि अगर किसी कॉलेज को इस तरह की शिकायत है तो वह प्रत्यावेदन दे। जितने फॉर्म कॉलेज को आवंटित हैं वह उतने ही अग्रसारित करेगा। इससे ज्यादा फॉर्म अग्रसारित नहीं करने दिए जाएंगे।
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