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राशन घोटाला- अब आधार के बहाने भी लगा रहे हैं गरीबों का राशन ठिकाने

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बरेली। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि आधार कार्ड को किसी भी कल्याणकारी योजना के लिए अनिवार्य नहीं माना जाएगा तो दूसरी तरफ कोटेदारों ने आधार कार्ड से लिंक न होने की वजह से जिले भर में हजारों लोगों राशन कार्ड पर राशन देना बंद कर दिया है। जिम्मेदार अधिकारी यह दावा तो कर रहे हैं कि आधार कार्ड की वजह से किसी को राशन देना बंद नहीं किया जा सकता लेकिन इस सवाल का उनके पास कोई जवाब नहीं है कि गरीबों का राशन हड़प रहे कोटेदारों के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं हो रही और इस घपले में हजारों क्विंटल अनाज कहां ठिकाने लगाया जा रहा है।
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शासन ने आदेश दिया है कि सभी राशनकार्डों को आधार से लिंक किया जाए। यह व्यवस्था भी की है कि कोटे की दुकानों पर बायोमेट्रिक सिस्टम पर आधारित पॉस मशीनों के जरिये ही राशन का वितरण किया जाएगा। शासन के इस आदेश के तहत जिले में 99528 अंत्योदय और 705095 पात्र गृहस्थी कार्डों को आधार से लिंक किया जाना है, लेकिन सालभर बाद भी 58602 अंत्योदय और 316838 पात्र गृहस्थी राशन कार्ड आधार से लिंक नहीं किए जा सके हैं। बताया जा रहा है कि पूर्ति विभाग के कर्मचारियों ने ऐसे करीब दस हजार राशनकार्डों को लिस्ट से ही गायब कर दिया है। इसके अलावा जिले भर में तमाम राशन कार्ड को आधार से लिंक न होने की वजह से अवैध बताकर राशन देना बंद कर दिया गया है।
दूसरी ओर अधिकारियों का कहना है कि इस लिस्ट में वे उपभोक्ता भी हैं जिनके दो कार्डों में नाम थे या सत्यापन के दौरान वे सही पते पर निवास करते नहीं मिले। राशनकार्ड धारक अधिकारियों के इस दावे को कोरा झूठ बता रहे हैं। उनका कहना है कि पूर्ति विभाग ने सत्यापन किए बगैर ही उनके राशन कार्ड निरस्त कर दिए हैं।
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गरीबों के लिए आता है 19 हजार मीट्रिक टन खाद्यान्न
पूर्ति विभाग को हर महीने पात्र गृहस्थी योजना के करीब सात लाख छह हजार उपभोक्ताओं के लिए 8937.828 मीट्रिक टन गेहूं और 5958.552 मीट्रिक टन चावल का आवंटन होता है। इस योजना में तीन किलो गेहूं और दो किलो चावल दिया जाता है। अंत्योदय योजना में हर महीने 1943.74 मीट्रिक टन गेहूं और 1495.305 मीट्रिक टन चावल आवंटित होता है। इस स्कीम में 20 किलो गेहूं ओर 15 किलो चावल उपभोक्ता को दिया जाता है।

आधार के बहाने राशन ठिकाने.. 22 के बाद होगी जांच
अधिकारी भी इस बात से इनकार नहीं कर पा रहे हैं कि तमाम कोटेदार आधार के राशनकार्ड लिंक न होने के बहाने उपभोक्ताओं को राशन नहीं दे रहे हैं। डीएसओ सीमा त्रिपाठी का कहना है कि वैसे तो ग्रामीण क्षेत्र की 1405 और शहरी क्षेेत्र की 415 राशन की दुकानों पर बायोमेट्रिक मशीनें लगा दी गई है, अब इससे घपला होने की गुंजाइश बहुत ही कम है। फिर भी 22 तारीख के बाद चेकिंग होगी कि कोटेदारों ने कितने लोगों को राशन नहीं बांटा है। हालांकि जांच से पहले ही इस घपले के पीछे उन्होंने यह संभावित कारण भी बताया कि कुछ दुकानों पर बायोमेट्रिक मशीनों में फाल्ट हो सकता है।

आधार के बगैर भी मिलेगा राशन
धांधली रोकने के लिए भले ही राशनकार्ड को आधार से जोड़ा जाना अनिवार्य है लेकिन यह बाध्यता नहीं है कि आधार के बगैर किसी उपभोक्ताओं को राशन देने से इंकार किया जा। पूर्ति विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मतदाता पहचान पत्र, पैन कार्ड या दूसरी आईडी दिखाकर भी उपभोक्ता राशन ले सकता है। डीएसओ ने बताया कि अगर ऐसा कोई कोटेदार कर रहा है तो इसकी शिकायत विभाग के आफिस में की जा सकती है।

सभी राशन कार्डों को आधार से लिंक किया जा रहा है। स्टाफ यह काम पूरी प्राथमिकता से कर रहा है। कोई भी राशन कार्ड आधार से लिंक न होने पर रद्द नहीं किया जा रहा है। अपात्र बताए जाने की दूसरी वजह भी हो सकती है। -सीमा त्रिपाठी, डीएसओ
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