आला हजरत इमाम अहमद रजा खां फाजिले बरेलवी के सौवें उर्स में शिरकत करने के लिए इस बार पाकिस्तानी जायरीन भी आ रहे हैं। 15 साल बाद यह मौका आया है जब पाकिस्तानी जायरीन अटारी बार्डर पार करके भारत पहुंचे है। यह 14 सदस्यीय दल देर रात बरेली पहुंचा है। इसके लिए भारत सरकार ने इन्हें विशेष अनुमति दी है।
शहजादे ताजुश्शरीया मुफ्ती असजद रजा खां कादरी (असजद मियां) की सरपरस्ती में शुरू हुए सौवें इंटरनेशनल उर्स-ए-रजवी में देश के अलावा विदेश से भी बड़ी संख्या में जायरीन और उलमा शिरकत करने पहुंच गए हैं। पाकिस्तान के अलावा अमेरिका, हालैंड, साउथ अफ्रीका, इंग्लैंड, मॉरिशस, बंगलादेश, सउदी अरब, मिस्र, श्रीलंका, लेबनान आदि के उलमा और मशाइख हैं। जो खास असजद मियां के दावतनामे पर पहुंचे हैं।
इसी तरह पाकिस्तान के मेहमान भी हैं। इसमें करांची और लाहौर से मोहम्मद जुबैर गोदिल, मोहम्मद असलम, शमीम बानो, मोहम्मद हामिद रजा, समीरा अवैस, गुलाम अवैस करनी, मोहम्मद जहीन मुरशाद, मोहम्मद इरफान, लाहौर से हाफिज कारी गुलाम रसूल नक्शबंद, मोहम्मद अमजद पटेल, मोहम्मद काशिफ हनीफ कादरी, हस्सान रजा, मोहम्मद अहमद रजा, मोहम्मद उसमान गनी हैं।
इस मामले में मुफ्ती असजद मियां का कहना है कि इस बार पाकिस्तानी जायरीन की आमद अमन और मोहब्बत का पैगाम है। इसमें सबसे बड़ा योगदान भारत के विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय का रहा है। जिन्होंने वीजा आवेदन को कुबूल करके एक उपकार ही नहीं किया बल्कि अमन, प्रेम और दोस्ताना रिश्तों को बढ़ावा दिया है।
जमात रजा मुस्तफा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं उर्स प्रभारी सलमान हसन खां कादरी ने कहा कि पाकिस्तानी मेहमानों का आना दोनों देशों को जोड़ने वाला कदम है। इसमें उन्होंने मदद के लिए गृहमंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री सुष्मा सुराज और केंद्रीय श्रम एवं रोजगार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संतोष गंगवार का शुक्रिया अदा किया है।