बोर्ड परीक्षाओं में स्टेटिक मजिस्ट्रेट की ड्यूटी करने वाले एक अधिकारी ने विभाग से अपना मेहनताना मांगा है। विभागीय अधिकारी तब हैरान रह गए जब वह मानदेय के लिए कोर्ट तक पहुंच गया। चूंकि शिक्षा विभाग स्टेटिक मजिस्ट्रेट को परीक्षा ड्यूटी के लिए अलग से टीए डीए नहीं देता है तो इसलिए उसका भुगतान नहीं किया था। अब कोर्ट के आदेश पर माध्यमिक शिक्षा विभाग ने डीआईओएस को पत्र भेजा है। कोर्ट ने पंद्रह दिन के भीतर मामले के निस्तारण के निर्देश दिए हैं।
नकलविहीन परीक्षा कराने के लिए शासन ने स्टेटिक मजिस्ट्रेट लगाने के निर्देश दिए थे। एक विभाग के अधिकारी को भी इसमें लगाया गया। उन्होंने 2017 में 33 और 2018 में भी अनवरत ड्यूटी की। इसके लिए उन्हें शहर से 30 से 40 किलोमीटर दूर तक जाना पड़ा। जबकि विभाग में स्टेटिक मजिस्ट्रेट को मानदेय देने का कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए जब उन्होंने टीए डीए मांगा तो डीआईओएस ने मानदेय देने से साफ मना कर दिया। अधिकारी ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की तो वहां से भी यही जवाब मिला। तब उन्होंने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। विभागीय अधिकारी तब हैरान रह गए जब माध्यमिक शिक्षा परिषद के निदेशक का पत्र कोर्ट के आदेश के साथ पहुंचा। पत्र में अधिकारी ने ड्यूटी करने का दर्द भी लिखा।
बोर्ड परीक्षा में एक अधिकारी ने स्टेटिक मजिस्ट्रेट की ड्यूटी की थी। मानदेय देने का कोई नियम नहीं है। इसलिए भुगतान नहीं किया गया। अब कोर्ट के आदेश पर माध्यमिक शिक्षा परिषद से पत्र आया है। जो निर्देश दिए गए हैं वैसी कार्यवाही की जाएगी। - डॉ. अचल कुमार मिश्रा, डीआईओएस