परिषदीय और मान्यता प्राप्त विद्यालयों में मिड डे मील के लिए गेहूं-चावल की तर्ज पर अरहर की दाल उपलब्ध कराने का आदेश हवा-हवाई साबित हुआ है। जनपद में 1604 मीट्रिक टन दाल का आवंटन किए जाने के बावजूद आपूर्ति नहीं की गई है। इससे विद्यालयों में दाल बनवाने के लिए प्रधानाध्यापकों को बाजार से ही खरीद करनी होगी।
मिड डे मील की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए सरकार ने नैफेड संस्था को वर्ष 2018-19 की पहली तिमाही के लिए अरहर की दाल की आपूर्ति एफसीआई को करने के आदेश 17 अप्रैल 2018 को दिए थे। प्रदेश के सभी 75 जनपदों में 52098 मीट्रिक टन अरहर की दाल आवंटित की गई। इसमें लखीमपुर को 1604 मीट्रिक टन दाल की आपूर्ति की जानी है। एसएफसी को एफसीआई के गोदाम से दाल का उठान करना था, जिसके लिए अप्रैल में ही एमडीएम के जिला समन्वयक ऋतुराज सिंह ने एसएफसी को डिमांड भेज दी थी। करीब तीन महीने बीत जाने के बावजूद अरहर की दाल की खेप विद्यालयों में पहुंचना तो दूर जनपद में नहीं आई है। एसएफसी के जिला प्रबंधक मंसूर अहमद ने दाल उठान के लिए एफसीआई को आरओ भेजा, तो एफसीआई ने माल न होने की बात कही है।
सप्ताह में दो दिन बच्चों को खिलानी है अरहर की दाल
मिड डे मील के मेन्यू के मुताबिक विद्यालयों में सप्ताह के दो दिन अरहर की दाल बनाई जानी है। मंगलवार को दाल-चावल दिया जाना है। गुरुवार को बच्चे दाल-रोटी खाएंगे।
दूध और फल का पैसा भेजा
मिड डे मील के साथ ही प्रत्येक सोमवार को बच्चों को भोजन के अलावा मौसमी फल का वितरण कराया जाएगा। बुधवार को दूध दिया जाएगा। जिला समन्वयक ऋतुराज सिंह ने बताया कि इसके लिए एमडीएम खातों में पैसा भेजा गया है।
एफसीआई का कहना है कि नैफेड द्वारा अरहर की दाल की आपूर्ति नहीं की गई है। इससे एसएफसी को दाल नहीं मिली। अभी पुरानी व्यवस्था के अनुसार बाजार से दाल खरीदकर मिड डे मील बनेगा। इस संबंध में सभी बीईओ को जानकारी दे दी गई है। -ऋतुराज सिंह, जिला समन्वयक, एमडीएम