परीक्षा सामग्री ऑनलाइन भेजी जाए, परीक्षा ऑनलाइन हो, मार्कशीट से लेकर तमाम डाक्यूमेंट लेने की ऑनलाइन सुविधा हो, शिक्षकों से लेकर कर्मचारियों तक और कॉलेजों से संबंधित सारा डाटा ऑनलाइन देखा जा सके। अभी तक यह भले ही मुमकिन न हो पर आने वाले समय में यह सब एमजेपी रुहेलखंड विवि में मुमकिन होगा, क्योंकि शासन स्तर से विश्वविद्यालयों का सारा कार्य ई-मोड में होने जा रहा है। विश्वविद्यालयों की पहचान भी ई-विश्वविद्यालय के रूप में होगी। सोमवार को लखनऊ में शासन के साथ हुई रुहेलखंड विश्वविद्यालय समेत प्रदेश के बारह विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की बैठक में इस पर सहमति बन गई। एनआईसी के जरिए ई-विश्वविद्यालय का यह सपना पूरा होगा। एकेडमिक से लेकर प्रशासनिक कार्य सभी ऑनलाइन होंगे। प्रदेश के यह विश्वविद्यालय आपस में भी जुड़ सकेंगे। सूचनाओं का आदान-प्रदान हो सकेगा।
परीक्षा की गोपनीयता और भी होगी मजबूत
विश्वविद्यालय द्वारा कॉलेजों को भेजी जाने वाली परीक्षा संबंधी सामग्री परीक्षा के कई दिन पहले भेजी जाती है। प्रश्नपत्रों की गोपनीयता उस स्तर की नहीं रह पाती। कई कॉलेजों में प्रश्नपत्र का रखरखाव तक भी ठीक से नहीं हो पाता। अब यह प्रक्रिया ऑनलाइन हो जाएगी यानी कॉलेजों को परीक्षा शुरू होने से करीब एक घंटे पहले उनकी लॉगिन में ही प्रश्नपत्र भेजे जाएंगे। कॉलेज इनकी कॉपी निकालकर परीक्षा कराएगा। इससे विवि का खर्चा भी बचेगा। हालांकि इस प्रक्रिया में परीक्षा को भी ऑनलाइन करने पर विचार चल रहा है।
किसी भी कॉलेज का प्रोफाइल देख सकेंगे
छात्र एडमीशन से पहले किसी भी कॉलेज का प्रोफाइल विवि की वेबसाइट पर ही देख सकेंगे। उसको किसी कॉलेज में जाने की जरूरत नहीं होगी। शिक्षकों से लेकर कॉलेज में आधारभूत सुविधाएं, लाइब्रेरी, पुस्तकालय, ग्राउंड तक छात्र ऑनलाइन देख सकेगा। इससे वह सही कॉलेज का चुनाव कर सकेगा।
यह कार्य होंगे ऑनलाइन
-एडमीशन प्रक्रिया
-परीक्षा सामग्री भेजना
-कॉलेजों का प्रोफाइल
-कैंपस के विभागों की सारी जानकारी
-लाइब्रेरी में ई-बुक्स
-मार्कशीट, डिग्री व अन्य दस्तावेज
-विवि की फाइलों में होने वाले कार्य
-कॉलेजों को संबद्धता देने की प्रक्रिया
शासन प्रदेश के बारह विश्वविद्यालयों को ई-विश्वविद्यालय के रूप में बनाना चाहता है। इसके तहत परीक्षा से लेकर एडमीशन तक सारे कार्य ऑनलाइन होंगे। संबद्धता के आवेदन पहले ही ऑनलाइन हो चुके हैं। पूरी प्रक्रिया में वक्त लेगा पर सारी चीजें ऑनलाइन हो जाएंगी। सहमति बन गई है।
-प्रोफेसर अनिल कुमार शुक्ला, कुलपति