बरेली। लोकसभा चुनाव के नतीजे तो चार दिन बाद आएंगे लेकिन खुफिया विभाग की रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि बरेली मंडल में भाजपा को तगड़ा झटका लगने जा रहा है। मंडल की पांच में से चार सीटों पर काबिज भाजपा के हाथों से इस बार बदायूं की सीट के साथ आंवला की भी सीट निकल गई है। इसके साथ शाहजहांपुर में भी भाजपा की जीत साफ नहीं है। वहां भाजपा के उम्मीदवार अरुण सागर का गठबंधन के प्रत्याशी अमर चंद्र जौहर के साथ कांटे का मुकाबला है लेकिन अरुण इसमें मात भी खा सकते हैं। खुफिया विभाग के मुताबिक सिर्फ बरेली और पीलीभीत सीट पर ही भाजपा की जीत तय है।
खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक बरेली लोकसभा क्षेत्र में 18 लाख से ज्यादा वोटरों में करीब पांच लाख मुस्लिम, 1.56 लाख जाटव मतदाताओं के साथ कुल तीन लाख दलित, 71 हजार यादव, 3.5 लाख कुर्मी और बाकी अन्य जातियाें के वोटर हैं। चुनाव में करीब 10.82 लाख मतदाताओं ने वोट डाले हैं। रिपोर्ट के अनुसार गठबंधन के प्रत्याशी भगवत सरन गंगवार अपनी कुर्मी बिरादरी के वोटरों में कोई खास पैठ नहीं बना पाए। वोटिंग प्रतिशत के हिसाब से उन्हें बमुश्किल 4.5 से पांच लाख के बीच ही वोट मिलने की संभावना है जबकि भाजपा के प्रत्याशी संतोष गंगवार को पांच से साढ़े पांच लाख के बीच वोट मिल सकते हैं। खुफिया रिपोर्ट में कांग्रेस और दूसरे प्रत्याशियों के 1.2 से 1.5 लाख वोटों के बीच सिमटने की उम्मीद जताई गई है।
बरेली के उलट रिपोर्ट में आंवला की सीट गठबंधन के खाते में जाने की भविष्यवाणी की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक आंवला क्षेत्र में करीब 17.7 लाख वोटर हैं जिनमें 3.52 लाख मुस्लिम, 3.5 लाख दलित, 1.75 लाख यादव, 2.25 लाख क्षत्रिय, एक लाख वैश्य और 50 हजार कश्यप हैं। चुनाव में यहां करीब 58 प्रतिशत से ज्यादा वोटिंग हुई। सवा दो लाख क्षत्रिय वोटरों का छोटा हिस्सा ही भाजपा की झोली में आया और ज्यादातर कांग्रेस प्रत्याशी सर्वराज सिंह को चला गया। भाजपा प्रत्याशी को नुकसान होने की वजह आंवला क्षेत्र में एक विधायक और मंत्री के बीच चल रही खींचतान और एक विधायक की नाराजगी को भी बताया गया है।
बदायूं सीट पर सपा प्रत्याशी धर्मेंद्र कश्यप और भाजपा प्रत्याशी संघमित्रा मौर्य के बीच मुकाबले में धर्मेंद्र की जीत का दावा किया गया है। इस क्षेत्र के 18.9 लाख वोटरों में 3.50 लाख मुस्लिम, चार लाख यादव, दो लाख दलित और 2.70 लाख मौर्य-शाक्य मतदाता हैं। खुफिया रिपोर्ट में कहा गया है कि कांग्रेस प्रत्याशी सलीम शेरवानी और आबिद रजा की जुगलबंदी भी मुस्लिमों को तोड़ने में नाकामयाब रही। भाजपा प्रत्याशी संघमित्रा को बाहरी प्रत्याशी होने की वजह से भी अंदरूनी तौर पर नुकसान उठाना पड़ा है। सपा प्रत्याशी धर्मेंद्र यादव मुस्लिम, यादव के साथ दलितों और दूसरी जातियों के वोट हासिल करने में भी कामयाब रहे।
रिपोर्ट के मुताबिक शाहजहांपुर लोकसभा क्षेत्र में 21 लाख मतदाताओं में से 4.5 लाख मुस्लिम, 4.2 लाख दलित और 1.75 लाख यादव हैं। भाजपा, गठबंधन यानी बसपा और कांग्रेस तीनों ने जाटव बिरादरी के प्रत्याशी उतारे। कांग्रेस प्रत्याशी ब्रह्मस्वरूप सागर बरेली से थे इसलिए वोटरों पर पकड़ नहीं बना पाए। भाजपा प्रत्याशी अरुण सागर की सामान्य और पिछड़ी जाति के लोगों में छवि अच्छी नहीं मानी जाती है। उनकी छवि है कि बसपा सरकार के कार्यकाल में उनके इशारे पर एससी-एसटी एक्ट के बेतहाशा मुकदमे दर्ज हुए। बसपा प्रत्याशी अमर चंद्र जौहर की जनता के बीच सामान्य छवि है। उन्हें मुस्लिम यादव और बसपा कैडर वोट के अलावा अपनी बिरादरी के भी ज्यादा वोट मिलने का अनुमान है। हालांकि इसके बावजूद मोदी मैजिक की वजह से उनकी भी जीत बहुत साफ नहीं है।
पीलीभीत सीट स्पष्ट रूप से भाजपा के खाते में बताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक पीलीभीत क्षेत्र में करीब 17.5 लाख वोटर हैं। यहां भी सीधी टक्कर भाजपा के वरुण गांधी और गठबंधन प्रत्याशी हेमराज वर्मा के बीच रही। कांग्रेस ने प्रत्याशी नहीं उतारा। खुफिया रिपोर्ट के अनुसार पीलीभीत में मोदी लहर गठबंधन पर हावी लग रही है। हालांकि गठबंधन प्रत्याशी को भी अच्छा वोट मिला लेकिन सदर, बरखेड़ा, पूरनपुर और बीसलपुर में वरुण गांधी को मिले अपार समर्थन ने उन्हें निर्णायक बढ़त दिला दी। हेमराज वर्मा को अपनी बिरादरी के साथ दलित वोटों के बंटने से भी नुकसान होने की संभावना है।