बरेली। 19 साल पहले साथी दरोगा अरविंद प्रताप सिंह की हत्या में दोषी दरोगा शबनम को विशेष न्यायाधीश एससी एसटी एक्ट रवि नाथ की अदालत ने सात साल कैद की सजा सुनाई। अदालत ने उसको गैर इरादतन हत्या में दोषी ठहराते हुए बीते गुरुवार को जेल भेज दिया था।
इस माममले की रिपोर्ट मृतक दरोगा अरविंद प्रताप सिंह के भाई सुरेंद्र सिंह ने 12 मार्च 2000 को दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में कहा था कि उनके बड़े भाई अरविंद प्रताप सिंह थाना कैँट में उपनिरीक्षक के पद पर तैनात थे। 11 मार्च 2000 की रात करीब दस बजे अरविंद घर पर आए थे। उनके पीछे दरोगा शबनम और उसके साथ दो अन्य युवक आए। शबनम ने कुछ जरूरी बात का हवाला देकर अरविंद को घर चलने के लिए कहा। इसके बाद अरविंद शबनम के साथ चले गए। अगले दिन भी जब साढ़े बारह बजे दोपहर तक अरविंद घर पर नहीं पहुंचे तो उन्हें ढूंढा गया। इस बीच पता चला कि अरविंद की मोटर साइकिल दरोगा शबनम के सिविल लाइंस स्थित आवास विकास के मकान के दरवाजे पर खड़ी है। सुरेंद्र और उनके अन्य रिश्तेदारों ने अंदर जाकर देखा तो अरविंद की खून से लथपथ लाश शबनम के कमरे में पड़ी थी। मुकदमा में 17 साल तक हाई कोर्ट से स्टे रहा ।
मुकदमे में अभियोजन की ओर से कुल 19 गवाह पेश किए गए । गवाही देने वालों में तत्कालीन एसएसपी कमल सक्सेना, तत्कालीन एडीएम सिटी मंजुल कुमार जोशी और तत्कालीन एसपी आरए गुलाब सिंह भी रहे। कोर्ट ने गुरुवार को इस मामले में शबनम को गैर इरादतन हत्या का दोषी पाते हुए जेल भेज दिया था। इस मामले में आज अदालत ने दरोगा शबनम को सात साल की सजा सुनाई और उस पर चालीस हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया।