बरेली। पाकिस्तान के बालाकोट में भारतीय वायुसेना की एयर स्ट्राइक के बाद सैन्य मुख्यालय ने सेना की सभी इकाइयों को हाई अलर्ट के निर्देश दिए हैं। इसके बाद सैन्य इलाकों चौकसी बढ़ा दी गई है। सैन्य इलाकों के आसपास गश्त तेज कर दी गई है, साथ ही यहां से गुजरने वालों की निगरानी और चेकिंग भी तेज कर दी गई है। मुख्यालय से निर्देश दिया गया है कि सैन्य इलाकों में कोई भी संदिग्ध व्यक्ति दिखाई देने पर उससे पूछताछ की जाए और उसे पुलिस के सुपुर्द कर दिया जाए।
बरेली में वायुसेना के त्रिशूल एयरबेस के अलावा मिलिट्री का यूवी एरिया का कमांड ऑफिस और गरुड़ की यूनिट है, इस वजह से बरेली को अतिसंवेदनशील सैन्य क्षेत्रों में शामिल किया गया है। वैसे तो यहां पहले से अलर्ट जारी है, लेकिन पुलवामा में आतंकी हमले के जवाब में भारतीय वायुसेना की कार्रवाई के बाद सुरक्षा व्यवस्था को सख्त कर निगरानी को और बढ़ा दिया गया है। सेना का मूवमेंट आसपास के इलाकों में बढ़ गया है। क्यूआरटी (क्विक रिस्पांस टीम) और आर्मी इंटेलीजेंस अलर्ट पर हैं। सैन्य क्षेत्र से गुजरने वाले लोगों की प्रत्येक गतिविधि पर बारीकी से नजर रखी जा रही है। घोड़ा बटालियन रोड पर गुजरने वालों की आईडी चेक की जा रही है। पीबी मार्ग और बरेली क्लब के सामने चर्च मार्ग पर पुलवामा हमले के बाद से ही जनता के आवागमन पर रोक लगा दी गई थी। सैन्य अधिकारियों ने सुरक्षा कारणों से हो रही चेकिंग और सेना के दूसरे कार्यों में जनता से सहयोग करने की अपेक्षा की है।
कैंट और भरतौल में सैन्य गतिविधियां बढ़ीं
सेना के कैंट क्षेत्र के सदर बाजार, आरए बाजार और गोल बाजार समेत सैन्य क्षेत्र के करीब पांच सौ मीटर के दायरे में क्यूआरटी की आवाजाही मंगलवार से बढ़ गई है। भरतौल की ओर स्थित आर्मी एविएशन की ओर शाम से क्यूआरटी की गश्त बढ़ा दी गई है। सैन्य वाहनों समेत सशस्त्र जवान भी लगातार निरीक्षण कर रहे हैं। सैन्य सुरक्षा को देखते हुए इन इलाकों के लोग भी आने-जाने वाले नए व्यक्तिओं की गतिविधि पर निगाह जमाए हुए हैं।
दो बटालियन जम्मू रवाना
बालाकोट में आतंकियों को मार गिराने के बाद मंगलवार की देर शाम पाकिस्तान की ओर से जवाबी हमले को देखते हुए आईटीबीपी की दो बटालियन को जम्मू-कश्मीर के लिए रवाना कर दिया गया। बताया जाता है कि 128-128 जवानों की दो बटालियन यहां से रवाना हुई है। सूत्रों के मुताबिक सेना की इकाइयों से भी जवानों क ो जम्मू-कश्मीर रवाना किया गया है। हालांकि सैन्य अधिकारियों ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।