बरेली। राजनीतिक हल्कों में यह तय माना जा रहा है कि सपा-बसपा गठबंधन के मंडल की पांचों सीटों पर भाजपा का चुनावी गणित बिगाड़ेंगे। ऐसे में भाजपा पूरा जोर लगाएगी कि सपा का वोट बसपा और बसपा का वोट सपा को ट्रांसफर न हो। फिर भी भाजपा के लिए इस चुनाव में पुराना प्रदर्शन दोहराना बड़ी चुनौती होगी।
वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में सपा, बसपा, कांग्रेस और भाजपा ने अलग-अलग लड़ा था। उसमें मंडल की बरेली, शाहजहांपुर, पीलीभीत और आंवला लोकसभा सीटें भाजपा के खाते में गई थीं, एकमात्र बदायूं सीट पर सपा के धर्मेंद्र यादव चुनाव जीते थे। मोदी लहर में चारो सांसदों की जीत का अंतर भी बड़ा था। मगर सपा-बसपा गठबंधन होने के बाद इस बार मंडल की पांचों लोकसभा सीटों पर भाजपा, सपा-बसपा गठबंधन और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होगा। लोकसभा चुनाव में जातीय समीकरणों के अलावा अल्पसंख्यक वोटों का फैक्टर भी हार-जीत तय करेगा। सपा-बसपा गठबंधन के पक्ष में कैडर वोट ट्रांसफर हो गए तो भाजपा को हर सीट पर कांटे की टक्कर मिलेगी।