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‘सबरीमाला मंदिर में तोड़ी जा रही सनातन परंपरा’

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बरेली। सबरीमाला मंदिर मेें भगवान अयप्पा के दर्शनों के लिए करीब आठ सौ वर्ष पुरानी परंपरा को तोड़ जाने के विरोध में हिन्दू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने जबरन मंदिर में प्रवेश को हिन्दू भावनाओं पर आघात करार देते हुए नारेबाजी की और महिलाओं के प्रवेश को सोची समझी राजनीति बताया।
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रविवार को डीडीपुरम् चौराहा स्थित शहीद चौक पर हिन्दू संगठनों ने सबरीमाला मंदिर प्रकरण पर मानव शृंखला बनाकर विरोध प्रदर्शन किया। ‘सनातन धर्म पर आघात नहीं सहेगा हिन्दुस्तान’ लिखे नारे के बैनर तले हिन्दू संगठन दोपहर करीब ढाई बजे एकजुट हुए। लोग हाथों में ‘स्वामी शरणम् अयप्पा’ ‘हिन्दव: सहोदरा सर्वे’ ‘सेव सबरीमाला’ आदि स्लोगन लिखी तख्तियां पकड़े हुए थे। फिर शांति मार्च निकालकर सेलेक्शन प्वॉइंट चौराहा पर रोड जाम कर भारत माता की जय’ के नारे लगाए। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे संजय शुक्ला ने कहा कि भगवान अयप्पा के दर्शनों के लिए 41 दिनों की ‘बृथम परंपरा’ को पूरा करने का विधान है। हिन्दू धर्म मातृ शक्ति का सम्मान करता है। परंपरा को लिंग भेद से जोड़ा जाना गलत है। डॉ. रुचिन अग्रवाल ने कहा कि सनानत धर्म पर सोची समझी राजनीति के तहत आघात हो रहा है, जो समाज व देश के लिए घातक साबित होगा।

सनातन धर्म से नफरत करने वालों की है साजिश
केरल में रह चुके गिरीश पांडे ने कहा कि यह सिर्फ मंदिर में प्रवेश का मसला नहीं है खाड़ी देशों, वाम पंथियों और सनातन धर्म से नफरत करने वालों की साजिश है। जो लोग मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की बात कर रहे हैं वही लोग तीन तलाक और हलाला के मसले पर चुप्पी साध लेते हैं। खाड़ी देशों से कैंपेन चलाया जा रहा है। मंदिर कोई मॉल नहीं है। जिसको श्रद्धा नहीं है उसको प्रवेश नहीं करना चाहिए। इसके अलावा डॉ. विमल भारद्वाज, डॉ. अतुल श्रीवास्तव, डॉ. रुचि श्रीवास्तव, डॉ. पारुल, अमित कंचन, विवेक शर्मा, डॉ. सुविधा आदि ने अपने विचार रखे।
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