बरेली। सरकारी सिस्टम में संवेदनाओं की जगह कहां और जहां संवेदनाएं ही नहीं वहां गरीबों को सम्मान मिलने की उम्मीद भला कैसे की जा सकती है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत रविवार को आयोजित कार्यक्रम में विवाह के बंधन में बंधे जोड़े सिस्टम की इसी संवेदनशून्यता की वजह से शर्मसार दिखाई दिए। सरकारी योजना के तहत आंकड़ों की खानापूरी करनी थी, इसलिए उन्हें जैसे-तैसे घेर-बटोरकर लाया तो गया, लेकिन जमीन पर बैठाकर गंदगी के बीच खाना खिलाया गया और उपेक्षा के साथ शादी की दूसरी रस्में भी पूरी कराकर निजात पा ली गई।
गरीबों की अवहेलना करने वाला सिस्टम के इसी रवैये की वजह से मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में शामिल होने के लिए जोड़े ही नहीं मिल रहे थे। यही वजह रही कि इस बार श्री शिरडी साईं सेवा ट्रस्ट की ओर से गरीब लड़के-लड़कियों को ढूंढकर उनकी मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत शादी कराने का बीड़ा उठाया गया था। रविवार को गांधी उद्यान के तरणताल परिसर में करीब 58 जोड़ों की शदियां हुई, लेकिन माहौल ठीक वैसा नीरस सा दिखाई दिया जैसा आम सरकारी कार्यक्रमों की खानापूरी करने में रहता है। न शादी जैसी रौनक दिखाई दी न ही तैयारियां। प्रशासन ने भी इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। नगर निगम समेत दूसरे विभागों के भी अधिकारी यहां मौजूद थे, लेकिन फिर भी साफ-सफाई तक नहीं दिखी।
हद तो तब हो गई जब अफसरों ने शादी के बाद जोड़ों को यह कहकर बुलाया कि अब जल्दी से आकर खाना खा लो वर्ना फिर खाना नहीं मिल पाएगा। यही नहीं खाना खिलाने के लिए जहां मैदान में उन्हें बैठाया गया, वहां एक दरी तक बिछाने की जहमत नहीं उठाई। नए-नए दूल्हा-दुल्हन बने जोड़ों को शर्मिंदा होते हुए गंदगी के बीच ही बैठककर खाना खाना पड़ा। खाना खाने के बाद जगह-जगह खाए गए प्लेटों के ढेर लगे रहे। पंडाल के पास भी कूड़ेदान जैसे हालात रहे। खाने के बीच ही एक युवक के खाने में चींटे निकलने की भी शिकायत की।
अफसरों ने ग्रुप में फोटो खिंचवाई और पीठ थपथपा ली
एक ओर अव्यवस्था का अंबार दिखा तो दूसरी ओर प्रशासनिक अधिकारियों समेत मौजूद जन प्रतिनिधि सरकार की उपलब्धियों को गिनाकर पीठ थपथपाने में व्यस्त रहे। इस दौरान मंच पर शहर विधायक डॉ. अरुण कुमार, बिथरी चैनपुर विधायक राजेश मिश्रा ‘पप्पू भरतौल’, डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह समेत नगर निगम के अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।
बारातियों में सरकारी टंकी से पानी भरने को मारामारी
खाना खा लेने के बाद पानी पीने के लिए बाराती सरकारी टंकी पर निर्भर रहे। कुछ बाराती धक्कामुक्की से बचने के लिए गांधी उद्यान की कैंटीन पर चले गए। हालात यह रहे कि जब वर या कन्या पक्ष के लोग पानी न मिलने पर आयोजकों की ओर से लगाए गए वालंटियर्स से मिले तो उन्होंने भी कैंटीन की ओर इशारा कर दिया। यहां ‘सरकारी इंतजाम’ से लोग वाकिफ हुए।
58 शादियों में 9 मुस्लिम व दो सिख शामिल
आयोजन के तीन दिन पहले 54 शादियों का लक्ष्य था लेकिन आवेदन बढ़ने से संख्या 58 पहुंच गई। इसमें नगर निगम के माध्यम से 20 जोड़ों की शादी कराई गई। इसमें 47 हिन्दू जोड़ों की शादी हुई। साथ ही, अलग से सजे पंडाल में 9 मुस्लिम और 2 सिख जोड़ों की भी शादी हुई। विवाहित जोड़ों को सरकार की ओर से गृहस्थी का सामान दिया गया। निकाह कुतुबखाना स्थित सुनहरी मस्जिद के खतीब इमाम गुलाम यासीन मोहम्मदी ने निकाह पढ़ाया और दो लोगों को गवाह बनाया। इस दौरान शाहजहांपुर से आयी जहाना रियाज ने मांग में सिंदूर भरा जो चर्चा का विषय बना रहा। परिजनों के मुताबिक उनके यहां सिंदूर भरने का रिवाज है।