बरेली कॉलेज में स्वेटर वितरण घोटाले में एक शिक्षक की गर्दन फंसी तो उन्होंने चुपचाप स्वेटर खरीदकर कॉलेज को दे दिए। अब कॉलेज प्रशासन ये दिखाने में लगा है कि स्वेटर अलमारी में ही रखे रह गए थे, जो अब मिल गए हैं। बड़ा सवाल है यह है कि दो साल बाद कॉलेज प्रशासन को स्वेटर मिले तो क्या इस बीच किसी ने अलमारी खोलकर देखी ही नहीं। समिति ने भी अपनी रिपोर्ट प्रबंधन को सौंप दी है।
गरीब छात्रों को कॉलेज की तरफ से हर साल स्वेटर वितरित किए जाते हैं। दो साल पहले स्वेटर वितरण में घोटाला हो गया। सैकड़ों छात्रों को कागजों पर ही स्वेटर बांट दिए गए। मामला उछला तो प्रबंध समिति ने जांच समिति बना दी। जांच में यह भी सामने आया कि बाजार मूल्य से ज्यादा दामों में पर स्वेटर की खरीद दिखाई गई। डेढ़ लाख रुपये के स्वेटर जिम्मेदार डकार गए। अब दो साल बाद मामले में कार्रवाई की बारी आई तो गुपचुप तरीके से शिक्षक ने अपनी गलती मानते हुए स्वेटर खरीदकर कॉलेज को दे दिए हैं। सूत्रों की मानें तो वह पिछले दिनों प्रबंधन के सामने पेश हुए और जितने की गड़बड़ी हुई थी उतना पैसा देने के लिए तैयार हो गए। उससे स्वेटर खरीदकर आए और उनको कॉलेज की एक अलमारी से बरामद दिखा दिया। अब ये साबित किया जा रहा है कि दो साल से स्वेटर अलमारी में बंद थे। प्राचार्य डॉ. अजय शर्मा का कहना है समिति की रिपोर्ट आ जाए, उसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है।