टुल्ला- विधायक निधि घोटाला
योगीराज में भी सब गोलमाल
हेडिंग-विधायक और चेहते परेशान, इसलिए होकर रहेगा भुगतान
सबहेड- स्ट्रीट लाइट, पुलिया, सड़क, नाली-खड़ंजा नहीं मिला फिर भी विधायक निधि में हुए कथित विकास कार्यों का करना होगा भुगतान
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। विधायक निधि घोटाले की जांच में अंदरखाने सब कुछ ओके दिखाने की तैयारी चल रही है। इस मामले को लेकर आईपीसीएल नाम की एक फर्म के खिलाफ जांच चल रही है। इसलिए विधायक निधि के कामों का मोटा पेमेंट भी अटका हुआ है। बताते हैं कि फर्म की आड़ में कई विधायक और उनके चहेतों ने भी काम कराए थे। इस जांच से इनका पेमेंट भी फंसा हुआ है। इसलिए आनन-फानन में इस मामले से जुड़ी जांचों को तेजी से पूरा कराया जा रहा है।
सपा शासनकाल के खत्म होने के दौरान वर्ष 2016-17 में अवशेष विधायक निधि को खर्च करने की होड़ मची थी। उस वक्त इंडियन प्रोजेक्ट कारपोरेशन लिमिटेड के नाम से फर्म को काम दिया गया था। इस फर्म ने स्ट्रीट लाइट, पुलिया, सड़क, नाली-खड़ंजा सहित तमाम विकास कार्य के नाम पर मोटा भुगतान भी लिया था। उस वक्त डीआरडीए के अधिकारियों ने भी आंख मूंदकर कंपनी को आधा भुगतान भी कर दिया। बाद में यह खुलासा हुआ कि यह फर्म ब्लैक लिस्टेड है और उसने विधायक निधि के कई कामों में काफी गोलमाल किया है तो अधिकारियों में खलबली मच गई। सीडीओ सत्येंद्र कुमार ने जांच बैठा दी और कंपनी का सारा पेमेंट भी रोक दिया। सूत्रों की मानें तो इस कंपनी की आड़ में कई विधायक और उनके चहेतों ने भी निधि के काम कराने की आड़ में जमकर फर्जीवाड़ा किया था। इस जांच के चक्कर में उनका भी मोटा भुगतान लटका हुआ है। पेमेंट न होने से उनमें बेचैनी मची हुई है। इसलिए अधिकारियों पर यह दबाव है कि इस जांच को न केवल जल्द पूरा कराया जाए, बल्कि जांच रिपोर्ट में सब कुछ ओके भी दिखाया जाए। हालांकि इस प्रकरण से जुड़े अफसर इस बात को जुबां पर नहीं ला पा रहे। सूत्र बताते हैं कि आईपीसीएल की जांच करीब पूरी हो चुकी है।
वर्जन
विधायक निधि के कामों को लेकर आईपीसीएल की जांच चल रही है। इसमें तमाम अफसरों ने अपनी रिपोर्ट दे दी हैं। पूरी जांच पारदर्शिता के साथ कराई जा रही है। -सत्येंद्र कुमार, सीडीओ