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सॉलिड वेस्ट प्लांट कैंट

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कैंट में भी कूड़े को ‘कैश’ करने का खेल
बोर्ड की मंजूरी के बगैर नया प्लांट लगाने की शुरू हुई तैयारी

सेंट्रल कमांड की आपत्ति भी कर दी नजरंदाज
प्रस्ताव में कूड़े की मात्रा भी बढ़ी और खर्च भी

अमर उजाला ब्यूरो
बरेली।
कैंटोनमेंट बोर्ड के नये सॉलिड वेस्ट प्लांट का प्रस्ताव सेंट्रल कमांड में फंस गया है। प्रस्ताव में कूड़े की मात्रा और व्यय सीमा बढ़ने पर सवाल उठाया गया है। कैंटोनमेंट बोर्ड ने भी इसे मंजूरी नहीं दी है। इसके बावजूद कंपनी ने प्लांट लगाने का काम शुरू कर दिया है। उसने सारा सामान लाकर साइट पर सजा दिया है। इससे कैंट बोर्ड के अधिकारियों पर भी उंगली उठ रही है कि आखिर बिना मंजूरी के कंपनी का सामान वहां कैसे पहुंच गया।
कैंट बोर्ड का ठिरिया रोड पर सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट था। इसमें कूड़े से खाद बनाई जाती थी। जिस कंपनी को प्लांट चलाने की जिम्मेदारी दी गई थी, उस पर तमाम सवाल उठे। इस पर कई जांचें भी शुरू हो गईं। इस बार सॉलिड वेस्ट प्लांट का संचालन नई दिल्ली की कंपनी गणपति ट्रेडर्स से कराने की तैयारी शुरू हुई। इसके लिए 11.91 लाख रुपये प्रति माह की दर से 25 टन कूड़ा का रोज निस्तारण कराने का प्रस्ताव है। पहले यह ठेका प्रतिदिन पांच टन कूड़े के लिए 2.51 लाख रुपये महीने का था। प्रस्ताव में जब कूड़े की मात्रा और व्यय करीब पांच गुना बढ़ा तो सेंट्रल कमांड तक हलचल मची और इस पर आपत्ति कर दी गई। सेंट्रल कमांड का कहना है कि जब पांच टन कूड़ा था तो एक झटके में 25 टन कैसे हो गया। इसके अलावा अगर किसी दिन बारिश या किसी अन्य कारण के चलते कूड़ा पूरा नहीं हुआ और प्लांट बंद रहा तो उस दिन का खर्च देने या न देने पर क्या निर्णय होगा। वहीं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी है। इसके चलते बोर्ड मीटिंग में भी यह प्रस्ताव आने के बावजूद लटक गया।
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प्रस्ताव स्वीकृत नहीं तो काम कैसे शुरू
सेंट्रल कमांड और बोर्ड की मंजूरी के बिना कैंट में विकास से संबंधित कार्य नहीं हो सकते। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की कंपनी बदलने का प्रस्ताव भी अटक गया है। इसके बावजूद कंपनी के लोगों ने ठिरिया रोड पर प्लांट की मशीनें लाकर रख दी हैं। इसके अलावा प्लांट लगाने के लिए टिन शेड आदि भी तैयार कर लिया गया है।

खाद पर फिर मचेगा बवाल
पुराने प्लांट में दो बड़ी छलनी के जरिये कूड़े को छानकर मिट्टी अलग कर दी जाती थी। कंपनी के लोग इस मिट्टी को ही खाद बताते थे, जो कभी बिकी नहीं, जिसके चलते कैंट बोर्ड को भी नुकसान उठाना पड़ा। इस बार भी कुछ ऐसा ही होने जा रहा है। पुराने और नये प्लांट में अंतर सिर्फ इतना है कि पहले छलनी खुली थी लेकिन इस बार लोहे के बड़े से बॉक्स में बंद है। जानकारों का कहना है कि खाद की बिक्री का पेच इस बार भी फंसना तय है।

वर्जन
प्लांट लगाने का प्रस्ताव बोर्ड की बैठक में लाया गया था इसीलिए उनको सामान लाने को कह दिया गया। मगर सेंट्रल कमांड की आपत्ति के बाद काम रुकवा दिया गया है। वहां से एनओसी मिलने के बाद ही अब काम शुरू कराया जाएगा। - के लौहवुम, सीईओ, कैंट बोर्ड
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पहले पांच टन कूड़े के लिए प्लांट था, अब 25 टन कूड़े की बात हो रही है। इतना कूड़ा कैंट बोर्ड में कहां से आएगा, सेंट्रल कमांड और बोर्ड ने इस पर ही आपत्ति लगाई है। - मीता सती, उपाध्यक्ष, कैंट बोर्ड
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