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लाउडस्पीकर---

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फोटो- टोनी जी
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प्रशासन ने रखीं लाउडस्पीकर बजाने की शर्तें
मगर, नहीं हो पा रहा हाईकोर्ट के निर्देश का पालन
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। लाउडस्पीकर की आवाज नियंत्रित रखने के हाईकोर्ट के सख्त आदेश के बाद प्रशासन ने मंदिर और मस्जिदों में लाउस्पीकर लगाने की अनुमति तो दे दी, लेकिन उसमें कड़ी शर्तें लगा दीं। धर्मस्थलों की देखरेख करने वाले महंत, मौलाना, ग्रंथी या पादरियों से कहा गया है कि वह रात 10 से सुबह छह बजे तक किसी हाल में लाउडस्पीकर न बजाएं। बाकी समय में सुबह छह बजे से रात 10 बजे तक कम तीव्रता की आवाज में लाउडस्पीकर बजाने की अनुमति दी गई है। शर्तों का उल्लंघन करने पर पांच साल की सजा और एक लाख जुर्माने का प्रावधान भी है।
मस्जिदों में एक ही लाउडस्पीकर बजाने को कहा गया है। इसे बजाने का समय भी सुबह छह बजे से रात 10 बजे तक रखा गया है। एडीएम (सिटी) की ओर जारी अनुमति में कहा गया कि लाउडस्पीकर से ऐसी कोई तकरीर नहीं की जाएगी, जिससे दूसरे धर्म के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचे और शांति व्यवस्था प्रभावित हो। दूसरे संप्रदाय के घरों और धार्मिक स्थानों पर भी लाउडस्पीकर का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। अगर कोई कार्यक्रम किसी अन्य व्यक्ति की जगह पर किया जा रहा है तो जमीन मलिक से अनुमति लेनी होगी। ऐसा न करने पर लाउडस्पीकर बजाने की अनुमति स्वत: निरस्त समझी जाएगी। जिस स्थान पर लाउडस्पीकर का इस्तेमाल किया जा रहा है वहां ध्वनि का स्तर आवासीय एरिया में 45 से 55 और व्यावसायिक एरिया में 55 से 65 डेसिबल से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
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मस्जिद : लाउडस्पीकर बंद रहा तो कैसे होगी अजान
बरेली। प्रशासन की ओर से मस्जिदों को लाउडस्पीकर बजाने की सशर्त अनुमति में समय का पेच फंसा है। परमीशन में लाउडस्पीकर बजाने का समय सुबह छह बजे से रात दस बजे तक है। इमाम और मौलानाओं का कहना है कि प्रशासन की सशर्त अनुमति में फज्र की नमाज को लेकर तस्वीर साफ नहीं है। अभी दिन छोटे होने की वजह से फज्र की नमाज सुबह छह बजे हो जाती है लेकिन दिन बड़े होने पर नमाज का समय घटकर सुबह चार बजे तक आ जाएगा। ऐसे में अजान लाउडस्पीकर पर कैसे दी जा सकेगी। इसके अलावा रमजान के महीने के बारे में भी परमीशन में कुछ नहीं कहा गया है। माहे रमजान में सहरी के वक्त का मस्जिदों से एलान होता है। मकबरे वाली मस्जिद को मिली परमीशन में इस बात का कोई उल्लेख नहीं है। मकबरे वाली मस्जिद के मुतवल्ली शमीम अहमद खां कहते हैं कि इस बारे में जल्द ही और मस्जिदों के मुतवल्ली के साथ बैठक की जाएगी। इसमें तय किया जाएगा कि किस तरह प्रशासन से मिलकर लाउडस्पीकर बजाने के समय में तबदीली कराई जाए।


मंदिर: लाउडस्पीकरों की आवाज बाहर नहीं जाती
केस -एक
धोपेश्वर नाथ मंदिर- समय 12:15
कैंट स्थित श्री धोपेश्वर नाथ मंदिर में दो लाउडस्पीकर लगे हैं। अनुमति भी दो की है। महंत शिवानंद गिरि ने बताया कि पहले भी दो ही लाउडस्पीकर लगे थे। बताया, सुबह और शाम आरती के समय लाउडस्पीकर बजाये जाते हैं। जब कोई आयोजन आदि होता है, तब लाउडस्पीकर की संख्या बढ़ जाती है, लेकिन परमीशन उनकी भी होती है। वैसे भी आवाज इतनी रखी जाती है कि वह मंदिर परिसर में ही गूंजती है। इससे किसी को कोई दिक्कत नहीं होती है।

केस- 2
बाबा अलखनाथ मंदिर - समय 12:55
प्राचीन शिवालय बाबा अलखनाथ मंदिर में वर्तमान में सात लाउडस्पीकर लगे हैं। श्रीमहंत लक्ष्मण भारती ने बताया कि हमारे पास अनुमति 15 लाउडस्पीकर लगाने की है। मगर चार अलग-अलग मंदिरों में सात लाउडस्पीकर बजते हैं। यह शाम को पांच बजे से रात साढ़े नौ बजे तक बजाये जातेे हैं। जब कोई आयोजन होता है तब सभी 15 लाउडस्पीकर बजते हैं। मंदिर 96 बीघा परिसर में है, इस वजह से लाउडस्पीकरों की आवाज मंदिर परिसर में ही रहती है, बाहर नहीं जाती।
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केस- 3
पशुपति नाथ मंदिर- समय 2:00
बाईपास रोड स्थित पशुपतिनाथ मंदिर में दो लाउडस्पीकर लगे हैं। व्यवस्थापक जगमोहन सिंह ने बताया कि उनके पास प्रशासन की तरफ से चार लाउडस्पीकर लगाने की अनुमति है, लेकिन हर रोज केवल दो ही लाउडस्पीकर बजते हैं। वह भी शाम का चार से रात आठ बजे तक। इनकी आवाज इतनी कम रहती है ताकि किसी तरह का शोर महसूस न हो। बड़ा आयोजन होने पर बाकी लाउडस्पीकर भी बजते हैं।


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