प्रदेश सरकार ने फैसला लिया है कि लो वोल्टेज की समस्या से ग्रसित राजकीय नलकूपों को सौर ऊर्जा से संचालित किया जाएगा। इसके लिए पहले फेज में 6072 नलकूपों के लिए 1200 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। प्रदेश के प्रमुख सचिव (सिंचाई) दीपक सिंघल ने बरेली, मेरठ, आगरा, अलीगढ़ सहित आठ मंडलों से लो वोल्टेज की समस्या से प्रभावित राजकीय नलकूपों का ब्योरा मांगा है।
प्रमुख सचिव का मानना है कि लो वोल्टेज के कारण नलकूप चल नहीं पा रहे हैं और उनका बिजली विभाग को 2160 रुपये प्रति माह का भुगतान करना पड़ रहा है। जिसका कोई उपयोग नहीं हो रहा है। ऐसे में पहले फेज में 6072 सौर ऊर्जा पर आधारित नलकूप संचालित करके दो लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल की अतिरिक्त सिंचाई क्षमता बढ़ाई जा सकेगी। दूसरे फेज में दो लाख और नए क्षेत्रफल की सिंचाई क्षमता बढ़ाने की योजना है, जिस पर 10 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे। इनके लिए पूरा ढांचा नए सिरे से तैयार करना होगा।
इन नलकूपों को सौर ऊर्जा से संचालित करने पर छह से आठ घंटे तक खेतों को पानी दिया जा सकता है। यदि इस बिजली को ग्रिड ऊर्जा के हाइब्रिड सिस्टम से जोड़ेंगे तो 10 से 12 घंटे तक आसानी से खेतों की सिंचाई की जा सकेगी।
बरेली के 276 नलकूप जुड़ेंगे सौर ऊर्जा से
बरेली सर्किल के बरेली, बदायूं, पीलीभीत और शाहजहांपुर जिलों के 276 नलकूप लो वोल्टेज की समस्या से प्रभावित हैं। इनको पहले फेज में सौर ऊर्जा से जोड़ने की तैयारी है। इनके लिए स्थानीय स्तर पर प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। हालांकि लो वोल्टेज से प्रभावित इन नलकूपों का ब्योरा नलकूप विभाग की ओर से प्रमुख सचिव को पहले ही भेज दिया गया है।
ये सामान लगेंगे सौर ऊर्जा सिस्टम में
फोटो वोलेटिक सोलर पैनल्स। सोलर पंपसैट। इन्वर्टर, फ्लोमीटर, मॉडम, मॉनिटरिंग एवं कंट्रोल, कैमरा, नेट मीटरिंग के लिए मीटर। एलटी पैनल। जिन स्थानों पर सोलर सिस्टम के लिए जमीन नहीं होगी, वहां पर किसानों से इस सिस्टम के लिए लीज पर जमीन ली जाएगी।