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बरेली के गन्ना किसानों के 60 करोड़ कौन देगा

Wed, 05 Oct 2016 01:50 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
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प्रदेश की 50 चीनी मिलों के 700 करोड़ रुपये की ब्याज माफी में बरेली के करीब पांच लाख किसानों के 60.34 करोड़ रुपये भी हैं। यह राशि यहां की 17 चीनी मिलों को देनी चाहिए थी लेकिन सरकार ने जनहित का उल्लेख करके इस राशि को माफ कर दिया। अब सवाल उठ रहा है कि किसानों की इस राशि को आखिर कौन देगा, किसानों का दर्द और तर्क है कि हमने कर्जा लेकर फसल बोई। मिलों को गन्ना दिया और भुगतान एक साल के बाद मिला, ऐसे में कर्ज का ब्याज किसान ने बैंकों और साहूकारों को दिया। अब इस ब्याज को चीनी मिलों से लेने का नंबर आया तो उसे माफ कर दिया। ऐसे में इस ब्याज को किसान कहां से अदा करें।
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बरेली परिक्षेत्र में 17 चीनी मिल हैं, इनमें से 11 चीनी मिल प्राइवेट सेक्टर की हैं, जिन पर 52 करोड़ रुपये का ब्याज है। सहकारी क्षेत्र की सात चीनी मिलों पर 8.31 करोड़ रुपये का ब्याज है। यह ब्याज तो वित्तीय वर्ष 2014-15 का है। 2013-14 के 66 करोड़ रुपये भी पिछले साल प्रदेश सरकार माफ कर चुकी है। इसके अलावा वित्तीय वर्ष 2015-16 के 26 करोड़ रुपये रह गए हैं, इसके बारे में तो सरकार ने कोई फैसला नहीं लिया है। इन तीन वित्तीय वर्षों में यहां के पांच लाख किसानों का 1.52 अरब रुपया ब्याज बनता है। इसमें से 1.26 अरब रुपये तो माफ हो गए हैं।
चीनी मिल            ब्याज (करोड़ में)
पीलीभीत                  2.95
बरखेड़ा                    7.29
बहेड़ी                     15.16
मीरगंज                    03.64
नवाबगंज                  01.68
फरीदपुर                    03.20
बिसौली                    03.95
न्यौली                      03.00
रोजा                        04.29
निगोही                      01.87
मकसूदापुर                  04.65
साथा (अलीगढ़)           00.52
बीसलपुर                    01.60
पूरनपुर                       01.32
सेमीखेड़ा                     02.11
बदायूं                         00.81
तिलहर                        01.37
पुवायां                         01.10
वीएम सिंह बोले, हाईकोर्ट में रखेंगे इस मुद्दे को
किसान नेता वीएम सिंह का कहना है कि जनहित के नाम पर चीनी मिलों का ब्याज माफ करना किसानों का कत्ल करने के समान है। उन्होंने सवाल किया कि ऐसा क्या जनहित है कि प्रदेश की 50 चीनी मिलों के चक्कर में 50 लाख किसानों को 700 करोड़ का ब्याज छीन लिया गया। उनका कहना है कि असली जनहित तो किसानों को ब्याज दिलाना था। न कि चीनी मिलों का ब्याज माफ करना। किसान नेता का कहना है कि 16 अक्तूबर के बाद हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान इस मुद्दे को रखेंगे।
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