बरेली। त्योहारों पर मिलावटखोर किस कदर खेल कर रहे हैं, इसकी पुष्टि खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की ओर से भरे गए खाद्य पदार्थों के नमूनों की जांच रिपोर्ट कर रही है। 54 फीसदी नमूने घटिया पाए गए हैं। सर्वाधिक मिलावट मिठाइयों में मिली है। कई नमूने सेहत के लिए असुरक्षित भी पाए गए हैं।
दीपोत्सव के लिए मिठाइयों समेत अन्य खाद्य सामग्रियों की खरीदारी का दौर जारी है। मगर, बीते दिनों भरे गए नमूनों की जांच रिपोर्ट शुद्धता के दावे कर रहे मिलावटखोरों की पोल खोलने के लिए काफी है। विभाग की छापा कार्रवाई में भी घटिया मिठाइयों को नष्ट कराया जा रहा है। मिलावट की आशंका पर खाद्य पदार्थ जब्त किए जा रहे हैं। हालांकि, वर्तमान में भरे जा रहे नमूनों की जांच रिपोर्ट दो माह बाद आएगी, तब तक मिलावट का जहर लोगों के शरीर में घुल चुका होगा। लिहाजा, खरीदारी परखकर ही करें।
ये खाद्य पदार्थ मिले असुरक्षित
विभागीय रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल से सितंबर तक खाद्य पदार्थों के 470 नमूने भरे गए। इनमें से 427 की जांच रिपोर्ट मिली है। इसमें 44 खाद्य पदार्थ असुरक्षित मिले हैं। पाउच वाले पानी का एक, पनीर का दो, घी का एक, दूध से निर्मित मिठाई के पांच, दूध के दो, तेल के दो, दाल के तीन, बेकरी उत्पाद का एक नमूना असुरक्षित मिलने पर विक्रेताओं के खिलाफ संबंधित कोर्ट में वाद विचाराधीन है। शेष को नोटिस भेजा है।
161 खाद्य पदार्थ अधोमानक
जांच में 188 खाद्य पदार्थ भी मानकों पर खरे नहीं मिले हैं। रिपोर्ट के अनुसार 161 खाद्य पदार्थ अधोमानक मिले हैं। इसमें 92 विभिन्न प्रकार की दूध से निर्मित मिठाइयों के नमूने हैं। छेना, लौंज, सोन पापड़ी, काजू कतली तक अधोमानक मिला है। इसके अलावा मिस ब्रांडिंग के 13 और मिस पैकेजिंग के 14 नमूने हैं।
लिक्विड ग्लूकोज की मिठाई भी बाजार में
बाजार के जानकारों के मुताबिक कई मिलावटखोर चीनी की जगह लिक्विड ग्लूकोज से बनी मिठाइयां बाजार में बेच रहे हैं, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। लिक्विड ग्लूकोज से मिठाई बनाने पर लागत कम आती है। यह चीनी और गुड़ से बनी मिठाई से ज्यादा चमकदार होती हैं। सोनपापड़ी में परत अच्छी पड़ती है, मिल्क केक चमकदार होता है। ये मिलावटखोरी सेहत पर भारी पड़ रही है। इस बीच सोमवार को भी 22 किलो मिठाई नष्ट कराई गई। 15 खाद्य पदार्थों के नमूने भरे गए।
मिलावटखोरी रोकने के लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारी निरीक्षण, जब्तीकरण और घटिया खाद्य पदार्थ नष्ट करा रहे हैं। भरे गए नमूने में आधे से ज्यादा मानक पर खरे नहीं उतरे। इनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। - अपूर्व श्रीवास्तव, जिला अभिहित अधिकारी