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दो दशक में मार्केट बन गया डेलापीर चौराहा

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बरेली। दो दशक पहले तक डेलापीर शहर का सबसे उपेक्षित एरिया था। कालोनाइजरों ने डेलापीर में प्राधिकरण से बिना नक्शा मंजूर कराए छोटी-छोटी कॉलोनियां बसा दीं। अब यह शहर के सबसे बड़े वार्डों में से एक है। पेट्रोल पंप से डेलापीर चौराहे तक घना मार्केट बन चुका है। मगर बीडीए के मास्टर प्लान में यह एरिया कामर्शियल घोषित नहीं है, जबकि राजस्व विभाग के सर्किल रेट इस इलाके के कामर्शियल होने की गवाही देते हैं।
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मॉडल टाउन स्टेडियम के आगे डेलापीर चौराहे तक कम से कम 100 से अधिक बड़ी कामर्शियल इमारतें बनी हैं, जिसमें अधिकतर के मानचित्र बीडीए से स्वीकृत नहीं हैं। कुछ बड़ी इमारतों के नक्शे अगर स्वीकृत भी हैं तो वह मानचित्र के नियमों के हिसाब से निर्मित नहीं हैं। मास्टर प्लान में भी यह इलाका कामर्शियल घोषित नहीं है। बीडीए ने अपने बचाव के लिए शहर के कुछ नव विकसित इलाके मिश्रित (आवासीय कम कामर्शियल, जिसमें 70 प्रतिशत एरिया आवासीय होता है और बाकी कामर्शियल हो सकता है) घोषित कर रखे हैं। मॉडल टाउन के आगे रोड के दोनों ओर फर्नीचर, टाइल्स, बिल्डिंग मेटेरियल के शोरूम बने हैं। कुछ इलेक्ट्रानिक्स शोरूम भी हैं। कम से कम 15 से 20 बड़े नर्सिंग होम हैं। बैंकों के अलावा एटीएम भी बड़ी संख्या में हैं। पेट्रोल पंप के सामने चार नर्सिंग होम के अलावा नर्सिंग कॉलेज भी खुला है। दो से तीन बड़े होटल हैं। एक बरातघर कम बैंक्वेट हाल भी बना है। रोड के दोनों ओर 200 से अधिक दुकानें और 50 से ज्यादा विभिन्न शोरूम हैं। दुकानों, शोरूम, होटल या कांपलेक्स के पीछे के ज्यादातर हिस्से आवासीय हैं। डेलापीर चौराहे पर मिष्ठान की दुकानों के अलावा दो पेट्रोल पंप भी हैं। फल सब्जी ट्रेनिंग सेंटर भी हैं। उद्यान विभाग का मंडलीय दफ्तर भी इसी इलाके में है। यहां फल और सब्जी की मार्केट भी पेट्रोल पंप से शुरू होकर चौराहा होते हुए डेलापीर मंडी तक है। फल और सब्जी मार्केट में औसतन 500 से अधिक ठेले, खोखे या फड़ दुकानदार अपना छोटा-मोटा व्यापार करते हैं।
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