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जिमनास्टिक का सच.. फटे गद्दे-खराब उपकरण

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बरेली। खेलो इंडिया खेलो का सच जानना हो तो स्टेडियम में जाकर देखिए। वालीबॉल, फुटबाल, हॉकी की तरह ही जिम्नास्टिक की व्यवस्थाओं का भी हाल बुरा है। पिछले चार साल से बिना कोच खिलाड़ी प्रैक्टिस करते हैं। फटे गद्दे और लगभग खराब हो चुके उपकरणों के सहारे ही इस खेल में आगे बढ़ने का सपना देख रहे हैं।
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जिम्नास्टिक संतुलन, शक्ति, लचीलापन और नियंत्रण बनाने का खेल है। इसके लिए खिलाड़ियों को कड़ी मेहनत करनी पड़ती है, लेकिन यह मेहनत तभी सार्थक साबित हो सकती है जब अभ्यास करने के लिए बेहतर उपकरण भी हों। चार-पांच साल पहले तक जिले से बेहतर जिम्नास्टिक खिलाड़ी निकलते रहे हैं, लेकिन अब ऐसा नहीं हो पा रहा है। वजह कोच का न होना है। यहां जिम्नास्टिक के खिलाड़ियों की संख्या भी कम हो रही है। गुरुवार को स्टेडियम में जिम्नास्टिक के छोटे-बड़े बच्चे बिना कोच प्रैक्टिस करते देखे गए। पूछने पर कुछ पुराने खिलाड़ियों ने बताया कि चार साल से कोच नहीं है। फटे गद्दे पर गिरते समय चोट न लग जाए.. लिहाजा बच्चे उस पर दूसरा फटा पुराना गद्दा रख रहे थे। कुछ बच्चे सीनियर खिलाड़ियोें को देखकर प्रैक्टिस कर रहे थे। अभ्यास से पहले वार्मअप में भी कोई नियम नहीं दिखाई दिए। जिसको जितने देर जो इक्सरसाइज समझ में आई की।

अनिवन बार की एक राड गायब, स्प्रिंग बोर्ड खराब
स्टेडिम में जिम्नास्टिक के मौजूद संसाधन के बारे में पूछते ही खिलाड़ी कमियां दिखाने लगे। लगभग सभी खिलाड़ियों ने फटे गद्दे दिखाते हुए कहा कि कई साल से यह इसी हाल में हैं, लेकिन इसे बदलने की जहमत नहीं उठाई गई। इससे अभ्यास के दौरान चोट लगने का भय रहता है। बीम और अनिवन बार भी खराब हो चुका है। स्प्रिंग बोर्ड की स्प्रिंग खराब हो चुकी है, बोर्ड भी क्षतिग्रस्त है।
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‘वर्ष 14 से 17 तक चार बार नेशनल खेल चुका हूं। चार-पांच साल पहले यहां कोच रहते थे। जिम्नास्टिक के खिलाड़ियों ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक जिले का नाम रोशन किया। कोच न होने के कारण खिलाड़ियों की संख्या घट रही है। लड़कियां तो बहुत कम जिम्नास्टिक करने आती हैं। यहां अभ्यास के सभी उपकरण लगभग खराब हो चुके हैं। गद्दे फटे होने से भी दिक्तत रहती है। जो सीखा है वो भूल न जाएं इसलिए यहां अभ्यास करने आते हैं।
अमन

‘मैं नेशनल खेल चुकी हूं। कोई प्लेस नहीं लगी थी। कोच होते तो नेशनल से कोई पदक लाने की उम्मीद होती। अब तो जितना सीख चुकी हो उसे ही मेंटेन रखने में पसीने छूट रहे हैं। क्योकि यहां उपकरण भी काफी पुराने व लगभग बेकार से हो गए हैं। कुछ छोटे बच्चों को भी थोड़ा बहुत अभ्यास हम सीनियरों को कराना पड़ता है।’
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- योग्यता कुमारी
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