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पहले रामपुर का हिस्सा थी आंवला लोकसभा सीट

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बरेली। दिल्ली और लखनऊ के बीच स्थित बरेली रुहेलखंड मंडल का एक ऐसा शहर है, जिसमें दो लोकसभा क्षेत्र हैं। बरेली लोकसभा का गठन तो देश की आजादी के समय ही हो गया था, लेकिन आंवला लोकसभा सीट देश की आजादी से 20 साल बाद बनी थी। पहले आंवला लोकसभा क्षेत्र रामपुर लोकसभा सीट का हिस्सा था। 1967 के चौथे आम चुनाव में होने वाले परिसीमन में आंवला लोकसभा का गठन किया गया था। आंवला के मतदाता कई प्रत्याशियों को तो दो या तीन बार भी जिताकर संसद में भेज चुके हैं, लेकिन कई बार यहां के मतदाताओं ने दिग्गज नेताओं को पहली बार में ही इतना डरा दिया कि वह अगली बार या तो चुनाव लड़ने की हिम्मत नहीं जुटा सके या फिर करारी मात खाकर चारो खाने चित्त हो गए।
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आंवला लोकसभा में तीन विधानसभा क्षेत्र (बिथरी चैनपुर, फरीदपुर और आंवला), बरेली से दो विधानसभा क्षेत्र (दातागंज और शेखूपुर) आते हैं। बरेली और आंवला दोनों लोकसभा सीटों पर 33 लाख से अधिक मतदाता हैं। आंवला लोकसभा में इस बार मतदाताओं की संख्या 17 लाख से अधिक है। परिसीमन के बाद सन 1967 में हुए आम चुनाव में आंवला लोकसभा से कांग्रेस प्रत्याशी सावित्री श्याम अखिल भारतीय जनसंघ के ठाकुर बृजराज सिंह को हराकर पहली सांसद बनी थीं। 1971 के आम चुनाव में आंवला के मतदाताओं ने सावित्री श्याम को दोबारा जिताकर संसद पहुंचाया। उन्होंने दोनों आम चुनावों में अखिल भारतीय जनसंघ के बृजराज सिंह उर्फ आछू बाबू को हराया। लेकिन 1977 के आम चुनाव में अखिल भारतीय जनसंघ के ठाकुर बृजराज सिंह ने कांग्रेस की सावित्री श्याम को हराकर हिसाब चुकता कर लिया। वर्ष 1980 में जनता पार्टी के जयपाल सिंह कश्यप कांग्रेस की संतोष कुमारी पाठक को हराकर सांसद बने, लेकिन 1984 में कांग्रेस के कल्याण सिंह सोलंकी ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जयपाल सिंह कश्यप को हराकर इस सीट पर दोबारा कांग्रेस का कब्जा करा दिया। उसके बाद आंवला लोकसभा के चुनाव सर्वराज सिंह और राजवीर सिंह के इर्द-गिर्द घूमते रहे। 1989 में ठॉ. राजवीर सिंह ने भाजपा प्रत्याशी के रूप में निर्दलीय प्रत्याशी जयपाल कश्यप को फिर पटखनी दी। 1991 में राजवीर सिंह ने भाजपा प्रत्याशी के रूप में कांग्रेस की रमा कश्यप को हराया, लेकिन 1996 में कुंवर सर्वराज सिंह ने सपा प्रत्याशी के रूप में भाजपा प्रत्याशी राजवीर सिंह को हराकर यह सीट सपा की झोली में डाल दी। 1998 में फिर बदलाव हुआ और भाजपा के राजवीर सिंह ने सपा से कुंवर सर्वराज सिंह को पटखनी देकर अपना पुराना हिसाब बराबर कर लिया। 1999 में सपा के सर्वराज सिंह ने एक बार फिर राजवीर सिंह को हराकर भाजपा से सीट छीन ली। 2004 में सपा ने सर्वराज को टिकट नहीं दिया तो वह जनता दल यू से चुनाव लड़े। भाजपा से असंतुष्ट होकर राजवीर सिंह सपा के टिकट पर चुनाव लड़े। उसमें जीत जनता दल यू के सर्वराज की हुई। 2009 के लोकसभा चुनाव में आंवला से भाजपा प्रत्याशी मेनका गांधी ने सपा के धर्मेंद्र कश्यप को कांटे के मुकाबले में हराकर यह सीट जीती। मेनका गांधी ने अगली बार यानी 2014 में आंवला के बजाय पीलीभीत से चुनाव लड़ा। आंवला से भाजपा ने सपा से आए धर्मेंद्र कश्यप को टिकट दिया और वह 1.38 लाख से अधिक मतों से जीते। इस बार धर्मेंद्र कश्यप फिर भाजपा से मैदान में हैं। मगर उनको सपा-बसपा गठबंधन की रुचिवीरा और कांग्रेस के सर्वराज सिंह से कड़ी चुनौती मिल रही है। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी से अभी प्रत्याशी मैदान में आना बाकी है। कुल मिलाकर आंवला लोकसभा सीट पर कड़े त्रिकोणीय मुकाबले के आसार बन रहे हैं।

आठ बार ठाकुर और दो बार कश्यप उम्मीदवार जीते
आंवला लोकसभा सीट से सर्वाधिक आठ बार ठाकुर उम्मीदवार चुनाव जीते। ठाकुर प्रत्याशी के रूप में बृजराज सिंह, कल्याण सिंह सोलंकी एक-एक बार, राजवीर सिंह तीन बार, सर्वराज सिंह तीन बार सांसद रहे। कश्यप बिरादरी से जयपाल सिंह कश्यप के बाद वर्तमान सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने 2014 में जीत दर्ज की थी। अन्य प्रत्याशी के रूप में मेनका गांधी भी आंवला की सांसद रहीं।
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