बरेली। नया साल आने में पांच दिन से भी कम वक्त बचा है। सिविल एन्क्लेव यानी कि नाथनगरी एयर टर्मिनल से हवाई उड़ान इस साल भी शुरू हो पाने की उम्मीद धूमिल हो गई है। एयर टर्मिनल में एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने एप्रॉन, बाउंड्रीवाल और टैक्सी-वे का काम 80 से 90 फीसदी पूरा कर लिया है। मगर, रक्षा मंत्रालय की एनओसी अब भी उड़ान चालू होने में सबसे बड़ी बाधा है। एयरपोर्ट अथॉरिटी को अब 15 जनवरी तक एयर टर्मिनल का काम पूरा करने का अल्टीमेटम दिया है।
कांग्रेस के शासनकाल में स्वीकृत नागरिक हवाई अड्डे का भाजपा सरकार ने भले ही नाम बदलकर ‘नाथनगरी एयर टर्मिनल’ कर दिया है, लेकिन रक्षा मंत्रालय की एनओसी अभी भी हवाई सेवा शुरू कराने में सबसे बड़ी बाधा है। एयर टर्मिनल में एक बिजली सब स्टेशन भी बनना है। पॉवर कारपोरेशन ने अब तक प्रशासन को सब स्टेशन का प्रस्ताव तक नहीं भेजा है। बीएसएनएल को टर्मिनल एरिया में वाई-फाई की सुविधा देनी है, लेकिन अफसर इस मसले पर भी चुप्पी साधे हैं। टैक्सी-वे का निर्माण पूरा करने के लिए प्रशासन ने जो अतिरिक्त जमीन किसानों से खरीदी है, उसका पेमेंट अभी शासन से नहीं आया है। कुल मिलाकर अभी तक सिविल एन्क्लेव निर्माण पूरा कर हवाई उड़ान शुरू करने में कम से कम दो से तीन महीने लगेंगे। वह भी तब, जब रक्षामंत्रालय इसकी एनओसी समय से दे दे।
एयर टर्मिनल को मंजूरी दिलाने में ऐरन की रही अहम भूमिका
सिविल एन्क्लेव के निर्माण को मंजूरी दिलाने में पूर्व सांसद प्रवीण सिंह ऐरन की अहम भूमिका रही। 19 दिसंबर, 2012 को ऐरन ने लोकसभा में प्रश्न संख्या 4161 से बरेली में सिविल एन्क्लेव बनाने का मामला उठाया था। उस समय की सरकार में नगर विमानन राज्यमंत्री केसी वेणुगोपाल ने प्रश्न के उत्तर में तत्कालीन सांसद ऐरन को बताया था कि उत्तर प्रदेश के बरेली में हवाई पट्टी का प्रस्ताव स्वीकृत है। तत्कालीन नागरिक उड्डयन मंत्री ने लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में बरेली सांसद से कहा था कि बरेली में नागरिक हवाई अड्डे का उनके पास राज्य सरकार ने कोई प्रस्ताव नहीं भेजा था। मतलब, उस समय की राज्य सरकार सिविल एन्क्लेव के लिए गंभीर नहीं थी।
एयर टर्मिनल में एप्रान, बाउंड्रीवाल और टैक्सी वे का 80 से 90 प्रतिशत तक काम पूरा हो चुका है। हम बहुत जल्दी ही मौके पर जाकर प्रोजेक्ट की समीक्षा करने वाले हैं। एयरपोर्ट अथारिटी ऑफ इंडिया को 15 जनवरी तक अपना काम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। - सुल्तान अशरफ सिद्दीकी