रायबरेली जेल में शराब पीते वीडियो वायरल होने के बाद अलर्ट
लखीमपुर खीरी। रायबरेली जिला जेल में बंदियों के सामने रखे चना और शराब पीने का वीडियो वायरल होने के बाद अलर्ट घोषित किया गया है, इसके अलावा यहां के जेलर ज्ञान प्रकाश सिंह को रायबरेली जेल के हालात संभालने के लिए वहां से संबद्ध कर दिया गया है। जेलर ज्ञान प्रकाश रायबरेली चले भी गए हैं। उधर खीरी की जिला जेल में भी स्टॉफ की कमी बनी हुई है।
खीरी जिला जेल में 725 बंदियों/कैदियों को रखने की क्षमता है। इन बंदियों के रहने के लिए 17 बैरकहै लेकिन जेल में करीब 1800 लोग निरुद्ध हैं। पुलिस जब वांछितों और वारंटियों की गिरफ्तारी का अभियान चलाती है तो यह संख्या दो हजार का आंकड़ा पार कर जाती है। विवश होकर जेल प्रशासन बैरक में क्षमता से दो गुने अधिक बंदियों को रखता है। महिला बंदियों की निगरानी के लिए महिला बंदी रक्षक के नौ और हेड महिला बंदी रक्षक के दो पद हैं, लेकिन वर्तमान में दोनों पद खाली हैं। डिप्टी जेलर के चार पद हैं, लेकिन एक डिप्टी जेलर के राज्यमंत्री से संबद्ध होने के कारण तीन डिप्टी जेलरों से काम चलाया जा रहा है। मुख्य बंदी रक्षक और बंदी रक्षक जेल की सुरक्षा और निगरानी की महत्वपूर्ण कड़ी है, फिर भी इनकी कमी है। मुख्य बंदी रक्षक के 19 पदों के सापेक्ष महज आठ और 95 बंदी रक्षकों के सापेक्ष मात्र 52 बंदी रक्षक तैनात हैं। इनमें भी कुछ अन्य जेलों से अटैच हैं। स्टाफ की कमी के कारण जेल प्रशासन को काफी दिक्कतें हैं। जेल प्रशासन होमगार्डों को लगाकर निगरानी कर रहा है। जेल प्रशासन ने कई बार खाली पदों पर तैनाती के लिए शासन को पत्र भेजा लेकिन अभी तक पदों के मुताबिक तैनाती नहीं हो सकी है। गौरतलब है कि खीरी जेल में भी 30 जुलाई 2014 को तमंचा पहुंच गया था। बंदी रविंद्र लोध निवासी ढखवा थाना गोला कारागार के मुख्य गेट से तमंचा लहराते हुए फरार हुआ था। हालांकि बाद में उसे लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया गया था।
स्टाफ की कमी से नहीं शुरू हो सकी नई बैरक
क्षमता से कई गुना अधिक बंदी और कैदी होने के कारण जेल प्रशासन ने एक नई बैरक बनवाने का प्रस्ताव भेजा था, जिसे मंजूरी मिलने के बाद बैरक भी बनकर तैयार हो गई, लेकिन दिक्कत स्टाफ की है। स्टाफ न होने के कारण अभी नई बैरक को जेल प्रशासन चालू नहीं कर सका है।
सुरक्षा को धता बताकर भाग चुके हैं बंदी
10 सितंबर 1991 में मोहम्मद शमी निवासी कृष्णनगर कॉलोनी सदर कोतवाली कारागार परिसर के बाहरी कमान से फरार हो गया था।
30 जुलाई 2014 को रविंद्र लोध निवासी ढखवा थाना गोला और अजय तिवारी उर्फ दद्दू तिवारी निवासी सिकारी चौरा थाना मल्लीपुर जिला श्रावस्ती कारागार के मुख्य गेट से तमंचा लहराकर भाग निकला।
30 अक्तूबर 16 को रेप और हत्या का आरोपी मोहन जिला कारागार से फरार हुआ, जिसे पुलिस ने करीब पांच महीने बाद गिरफ्तार कर लिया था।
वर्जन.....
स्टाफ की कमी है। इस वजह से नई बैरकों को चालू नहीं कराया जा सका है। सुरक्षा को लेकर प्रशासन अलर्ट रहता है। होमगार्डों को लगाकर काम लिया जा रहा है। रायबरेली के जेलर के सस्पेंड होने के कारण कारागार प्रशासन ने जेलर ज्ञानप्रकाश को रायबरेली से अटैच किया है। इस पर वह रायबरेली चले गए हैं।
- आरबी पटेल, जेल अधीक्षक