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ऋण माफी का सर्कुलर न आने से बैंक असमंजस में

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बरेली।
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योगी सरकार ने भले ही किसानों का एक लाख तक का लोन माफ करने की घोषणा कर दी है। मगर, कैबिनेट के फैसले के दो महीने बाद भी ऋण माफी का सर्कुलर न आने से बैंक असमंजस में हैं। कुछ बैंकों की ग्रामीण क्षेत्र की शाखाएं किसानों को ऋण वसूली के नोटिस भी भेजने लगी हैं। लीड बैंक ने राष्ट्रीयकृत बैंक के महाप्रबंधकों को पत्र भेजकर किसानों को ऋण वसूली का नोटिस भेजने का विवरण मांगा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी कैबिनेट की पहली बैठक में लघु और सीमांत किसानों का एक लाख तक का ऋण माफ करने का निर्णय लिया था। तबसे बैंक भी ये मानकर चल रहे थे कि किसानों का ये लोन माफ होना है, लेकिन अभी तक शासन से सर्कुलर न आने से बैंक अब असमंजस में हैं। विभिन्न बैंकों की 421 शाखाओं से बरेली में 65 हजार लघु एवं सीमांत किसानों का लगभग 11 सौ करोड़ रुपये का कर्ज माफी का प्रस्ताव भेजा गया है। इसमें वे किसान शामिल हैं जो एक लाख की ऋण माफी के दायरे में हैं। बैंक अभी तक रिजर्व बैंक और यूपी सरकार के ऋण माफी वाले शासनादेश का इंतजार कर रहे हैं। इसी बीच राष्ट्रीयकृत बैंकों से किसानों को रूटीन प्रक्रिया के तहत ऋण वसूली नोटिस भेजे जाने से किसानों में हड़कंप है। ऋण माफी के दायरे में आने वाले किसान बैंकों के चक्कर लगाने लगे हैं। इसका फायदा लोन कराने वाले दलाल उठाने में लग गए हैं। वह लोन माफ कराने के बदले किसानों से कमीशन तय करने लगे हैं। मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में किसानों के आंदोलन को देखते हुए बैंक चाहते हैं कि ऋण माफी का सर्कुलर जल्द आए ताकि किसी तरह की समस्या खड़ी न हो।
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सरकार ने लघु एवं सीमांत किसानों के एक लाख तक के लोन माफ कर दिए हैं। कैबिनेट में फैसला हो चुका है तो लोन तो माफ होना ही है। हां, अभी सर्कुलर का इंतजार है ताकि उसमें ऋण माफी के नियम सामने आ जाएं। बैंक उसी आधार पर लोन माफी की प्रक्रिया शुरू करें।
-ओपी बढ़ेरा, लीड बैंक मैनेजर
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