एनजीटी की गाइडलाइन के मुताबिक, 10 हजार पौधे रोपने के लिए जमीन की तलाश शुरू
बरेली। झुमका तिराहा-रजऊ परसपुर के बीच 29.920 किलोमीटर लंबी रिंग रोड का काम वर्ष 2028 के मध्य तक पूरा किया जाएगा। 32 गांवों से गुजरने वाले रिंग रोड निर्माण के लिए 500 पेड़ों के कटान की अनुमति मिल गई है। वन विभाग को इनका कटान करता है। एनजीटी की गाइडलाइन के अनुसार इसके एवज में 10 गुना यानी पांच हजार पौधे रोपने के लिए भूमि की तलाश शुरू कर दी गई है।
रिंग रोड के इस 995 करोड़ के प्रोजेक्ट के लिए मार्च 2025 में स्वीकृति मिल गई थी, लेकिन वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के स्तर से एनओसी न मिलने की वजह से काम शुरू नहीं हो पाया। रिंग रोड के लिए 32 में से 29 गांवों में 180.73 हेक्टेयर जमीन अधिगृहीत की जा चुकी है। शेष तीन गांवों में भी भूमि अधिग्रहण तेज कर दिया गया है।
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) के परियोजना निदेशक अश्वनी चौहान ने बताया कि पेड़ों का कटान वन विभाग को करना है। कटान और पौधरोपण के लिए वन विभाग को धनराशि का भुगतान कर दिया गया है।
भूमि अधिग्रहण के बदले 650 करोड़ का भुगतान किसानों को किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि रिंग रोड पर दो फ्लाईओवर और तीन इंटरचेंज बनाए जाएंगे। इसके इलावा 10 छोटी पुलिया भी बनाई जानी हैं। पहले चरण में भूमि समतल करने का काम शुरू किया गया है। संवाद