दो दिन की छुट्टी के बाद कलेक्ट्रेट में एफएसडीए का ऑफिस खुला तो मांस की दुकान का लाइसेंस लेने के इच्छुक लोगों की भीड़ लग गई। मांस की दुकानों को अब तक 500 चालान जारी हो चुके हैं। चालान से बैंक में 100 रुपये फीस जमा करने के बाद अब तक 50 लोगों ने मांस की दुकान के लिए आवेदन कर दिया है। लाइसेंस शर्ते पूरी करने वालों को ही मिल पाएगा। बीमार और पान-गुटखा खाने वालों को लाइसेंस नहीं मिलेगा। शहरी इलाके में नगर निगम, नगर पालिका और पंचायत के अलावा जिस इलाके में दुकान खुलेगी वहां की पुलिस को एनओसी देनी होगी। ग्रामीण इलाकों में पुलिस के अलावा जिला पंचायत को एनओसी देने का अधिकार होगा। लाइसेंस का आवेदन करने वाले को मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा जारी मेडिकल प्रमाण पत्र देना होगा। यह भी लिखकर देना होगा कि वह पान-गुटखा का सेवन नहीं करता है।
नगर निकाय/जिला पंचायत को इन शर्तें पर देनी एनओसी देनी होगी
दुकान पक्की और धर्मस्थल से 50 मीटर दूर होनी चाहिए। उसमें वेंटीलेटर का इंतजाम हो। दुकान में फर्श हो और दीवारों पर पांच फिट टाइल्स लगी हो। दुकान में ड्रेनिंग सिस्टम होना चाहिए। स्वच्छ पेयजल का दुकान में इंतजाम हो। रिहाइशी मकान में दुकान नहीं होनी चाहिए। स्लाटर हाउस से लाकर ही मांस बेचा जाएगा। जिस दुकान में मांस बिकेगा वहां स्लाटिंग नहीं होगी।
पुलिस को इस शर्त पर एनओसी देनी है
दुकान खुलने से कानून व्यवस्था प्रभावित नहीं होगी। दुकान में पशु पक्षी किसी का मीट काटकर नहीं बेचा जाएगा। आसपास मिश्रित आबादी तो नहीं है। कोई धर्मस्थल को दुकान के आसपास नहीं है। सब्जी की दुकान के पास में दुकान तो नहीं है।
लाइसेंस लेने के इच्छुक लोगों को इंफ्रा स्ट्रेक्चर तैयार करना जरूरी है, लेकिन इस पर किसी का ध्यान नहीं है। जबकि सबसे पहले लाइसेंस लेने वालों को यही मानक पूरा करना होगा। मानक पूरा किए बगैर किसी को मांस की दुकान का लाइसेंस नहीं मिलेगा।
- ममता कुमारी-अभिहित अधिकारी, एफएसडीए