बरेली। 50 सालों तक थर्मल पॉवर प्लांट का कोई विकल्प नहीं है। भारत में बिजली उत्पादन का यह सबसे आसान तरीका है। यहां अभी कोयले की कोई कमी नहीं होनी हैं। अब कार्बन डाई ऑक्साइड के उत्सर्जन को कम करके एडवांस थर्मल प्लांट तैयार करने की जरूरत है। जामिया मिलिया इस्लामिया के प्रो. एमएम हसन ने यह जानकारी दी।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय के केमिकल इंजीनियरिंग विभग के सेमिनार में आए प्रो. एमएम हसन ने बताया कि भारत में 40 सुपर क्रिटिकल थर्मल पॉवर प्लांट की जरूरत है। अभी सिर्फ 19 पॉवर प्लांट हैं, वह भी सब क्रिटिकल प्लांट। इनकी जगह पर सुपर क्रिटिकल प्लांट लगाए जाएंगे तो दो हजार मेगाबाइट बिजली मिलेगी। अब नई तकनीक से बनने वाले प्लांट में कार्बन डाई ऑक्साइड उत्सर्जन कम करने पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में अभी न्यूक्लियर पॉवर प्लांट की स्थिति नहीं हैं। गिनती के न्यूक्लियर पॉवर प्लांट हैं, उनसे बिजली उत्पादन कम हो रहा है। भारत में 60 फीसदी बिजली की आपूर्ति थर्मल पॉवर प्लांट होती है। थर्मल पॉवर प्लांट भारत की बैक बोन है। अब तो सुपर क्रिटिकल पॉवर प्लांट की जगह अल्ट्रा सुपर और एडवांस सुपर क्रिटिकल प्लांट भी आ रहे हैं।