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किरन जैसी 49 और लड़कियों को चाहिए परिवार

Wed, 19 Jul 2017 01:19 AM IST
बरेली
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ममता आश्रम की चहारदीवारी में लड़कियों के लिए सरकार ने खाने-पीने और रहने का इंतजाम कर रखा है। उन्हें घर की तरह माहौल देने की कोशिश भी की जाती है, लेकिन घर तो घर होता है। माता-पिता और भाई-बहन का प्यार इस चहारदीवारी में तो नहीं मिल सकता है। समाजसेवी शैलेश कुमार शर्मा के प्रयास से अफसाना और किरन को उनका परिवार मिल गया, लेकिन इन जैसी 49 मानसिक मंदित लड़कियां अब भी ममता आश्रम में हैं। इसमें से कुछ की दिमागी हालत में सुधार भी हुआ है। शैलेश शर्मा ने 15 लड़कियों की काउंसलिंग कर इनके बारे में कुछ जानकारियां जुटाई हैं। इनमें से आधा दर्जन लड़कियां बिहार की हैं। बाकी यूपी के कई जिलों से यहां आई हैं। काउंसलिंग में मिली जानकारी के सहारे पता लगाकर उनके परिवार से मिलवाने की कोशिश की जा रही है।  
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कागजों में उलझ गई छात्रा की जिंदगी 
बरेली। ममता आश्रम में रहने वाली हर लड़की की अपनी कहानी है, लेकिन यह कहानी उसके परिवार वालों से मिलने के बाद ही खुल पाती है। इससे पहले तो लड़कियां जो नाम बता देती हैं, उसी के आधार पर उनका नाम लिखकर भर्ती कराने के बाद इलाज शुरू करा दिया जाता है। मंगलवार को इसी आश्रम में रहने वाली मीरगंज की एक लड़की की बड़ी दर्द भरी कहानी है। 
मीरगंज की यह लड़की गरीब परिवार से है, लेकिन कुछ बनने की तमन्ना लिए पूरी मेहनत से पढ़ाई क र रही थी। 2012 में वह हाईस्कूल में थी। इस दौरान कस्बे के ही रामलीला ग्राउंड से मेला देखकर लौटते समय उसे दरिंदों ने हवस का शिकार बना लिया था। अगले दिन खेत में बदहवास हालत में मिली लड़की को पुलिस ने जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया था। इस सदमे को वह बर्दाश्त नहीं कर पाई और मानसिक संतुलन बिगड़ जाने पर घर से भाग गई। इसके बाद इधर-उधर भटकती रही। रेप के आरोपियों को पुलिस ने जेल भेज दिया। 2014 में उसे फिर से लावारिस हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में उसने अपना नाम गलत बता दिया। यहां परिवारवाले उससे मिलने आए लेकिन लेकर नहीं गए। 19 मार्च, 2015 में लड़की गलत नाम से ही ममता आश्रम में दाखिल हो गई। परिवारवाले यहां भी मिलने आते हैं। लड़की के पिता और भाई कई बार उससे मिल चुके हैं। हाल ही मैं लड़की का भाई उससे मिलने आया था। कह रहा था कि उससे कोर्ट में बयान कराने हैं, लेकिन घर ले जाने पर उसने जोर नहीं दिया। लड़की की घर वापसी के लिए नाम भी सही कराना जरूरी है। परिवार के लोगों ने इसके लिए भी कोई ठोस प्रयास नहीं किया है। नाम सही होते ही लड़की के घर जाने का रास्ता साफ हो जाएगा। 
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मानसिक मंदित लड़कियों को उनके घर पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। समाजसेवी शैलेश शर्मा के प्रयास से दो लड़कियां अपने परिवार के पास पहुंच गई हैं। बाकी लड़कियों की काउंसलिंग की जा रही है ताकि वे अपने परिवार के पास पहुंच जाएं। - दुर्गेश जौहरी, अधीक्षिका, ममता आश्रम, बीसलपुर रोड, हरुनगला
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मुझे सड़क पर भटकते लोगों की मदद करने से सुकून मिलता है। अफसाना और किरन जैसी लड़कियों के परिवारवालों की खुशियां और दुआएं आगे काम करने का हौसला देती हैं। जिन लोगों को लोग गंदे कपड़ों में सड़कों पर घूमता देखकर आगे निकल जाते हैं, उनकी सेवा करने में मुझे आनंद आता है। ममता आश्रम के अलावा और भी ऐसे संस्थानों में जाकर काउंसलिंग कर लड़कियों को घर पहुंचाने की कोशिश की जाएगी।     - शैलेश कुमार शर्मा, अध्यक्ष, मनो समर्पण मनोसामाजिक सेवा समिति, बरेली।
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