करीब 60 साल पुराने आनंद आश्रम को जल्द ही एक भव्य रूप मिलने वाला है। अप्रैल 2016 से मंदिर को बिल्कुल अलग स्वरूप देने का काम चल रहा है। यह दिसंबर 2018 तक बनकर तैयार हो जाएगा। पुराने आश्रम की जगह नए आश्रम में भक्ताें को बैठने के लिए काफी जगह मिलेगी। 45 फुट ऊंचे आनंद आश्रम को इको फ्रें डली बनाया जा रहा है। यह सोलर लाइट से जगमगाएगा।
मंदिर ट्रस्ट के विश्वास अग्रवाल ने बताया कि आनंद आश्रम से लोगाें की आस्था जुड़ी है। यह एक ऐसा मंदिर है जिसे लोग आश्रम के नाम से जानते हैं। संताें से इसका नाता रहा है इसलिए प्रभु की इच्छा से इसका निर्माण शुरू हो पाया। आश्रम को शहर के अन्य मंदिराें से हटकर बनाने के लिए आर्किटेक अनुपम सक्सेना का सहयोग लिया जा रहा है। बरसात के पानी का पूरा सदुपयोग हो इसलिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी बनेगा। गेट को काफी छोटा लेकिन और सुंदर करने का प्लान है।
वातानुकूलित हाल होगा: अनुपम सक्सेना
आर्किटेक अनुपम सक्सेना ने बताया कि 50 गुणा 50 का हॉल सेंट्रलाइज वातानुकूलित होगा। एसी सोलर सिस्टम से चलेगा ताकि बिजली की खपत कम हो। सबसे ज्यादा सुंदरता इस मंदिर की ऊंचाई होगी। लैंड स्केपिंग भी की जाएगी। भक्तों को बैठने की सुविधा मिलेगी और पूरे आश्रम की सुंदरता बढ़ाई जाएगी।
मंदिर से जुड़ी है दूर-दराज के लोगों की आस्था
विश्वास अग्रवाल बताते हैं कि वर्ष 1955- 56 में मंदिर की आधारशिला सुखदेवानंद जी महाराज ने रखी थी। तब यहां टिन शेड था, धीरे-धीरे कमरे बनाए गए। आश्रम के नाम से यह इकलौता मंदिर है यहां संत लोगाें का जुड़ाव रहा है। धर्मार्थ के कार्य भी मंदिर ट्रस्ट कराता है। शरद पूर्णिमा की रात खीर बनाकर उसे खुले आसमान के नीचे रखते हैं और अगले दिन उसका वितरण करते हैं। आस्था है कि इसे खाने से पुराने रोग से निजात मिलती है।