बरेली। एफसीआई के गोदामों में पहुंचने से पहले ही गरीबों और बच्चों को बंटने वाले अनाज को बदल दिया जा रहा है। इस गोरखधंधे में कई राशन माफिया न सिर्फ मिलकर काम कर रहे हैं बल्कि उन्होंने इसके लिए बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय कर रखा है। यह राशन घोटाला विभाग के बड़े-बड़े अफसरों की साठगांठ से अंजाम तक पहुंचता है, इसका एक ताजा उदाहरण यह भी है कि पिछले दिनों रिठौरा में जिस राशन घोटाले का पर्दाफाश हुआ, उसमें शामिल एक भी कर्मचारी अब तक सस्पेंड नहीं हुआ है। भुता गोदाम प्रभारी सौमित्र पाल के निलंबन के लिए लिखे डीएम के पत्र पर एसएफसी के प्रबंध निदेशक ने सिर्फ इतना किया कि उसे पीलीभीत ट्रांसफर कर जांच बैठा दी है। अब डीएम वीके सिंह ने पांच सदस्यीय टीम बनाकर एफसीआई गोदामों में भंडारित अनाज के सैंपल भरने के निर्देश दिए हैं।
सरकारी राशन को ठिकाने लगाने में ‘कन्हैया जी’ का खास रोल बताया जाता है क्योंकि ‘कन्हैया जी’ भुता में एफसीआई गोदाम के सामने ही विराजमान हैं। ऊपर से नीचे तक सेटिंग होेने के कारण सबकुछ गोलमाल होता रहता है। अब तो यह भी साबित हो चुका है कि भुता गोदाम से ही रिठौरा के आढ़ती कमल गुप्ता को गेहूं-चावल ब्लैक करने को दिया जाता था। हालांकि इस गोरखधंधे में एफसीआई के अधिकांश गोदाम शामिल हैं। आपसी मिलीभगत से ही गोदामों में कूड़ा मिला खराब गेहूं-चावल भंडारित किया जाता है।
लगातार शिकायतों और अमर उजाला में प्रकाशित खबरों का संज्ञान लेते हुए एसएफसी के मंडलीय प्रबंधक पवन चतुर्वेदी के आग्रह पर डीएम वीके सिंह ने एफसीआई गोदामों में भंडारित अनाज के सैंपल भरने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ डीएम ने कहा है कि गरीबों और बच्चों को वितरित होने वाले सरकारी अनाज की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाए। इसलिए उन्होंने पांच सदस्यीय टीम गठित करा दी है। जिसमें जिला पूर्ति अधिकारी, डिप्टी आरएमओ, एसएफसी प्रबंधक, बीएसए और जिला कार्यक्रम अधिकारी नामिल किए गए हैं। एडीएम प्रशासन आरएस द्विवेदी ने डीएम के निर्देश पर एफसीआई को पत्र लिखकर कहा है कि निर्धारित मानकों के अनुरूप ही अनाज सप्लाई किया जाए। इसके साथ ही, गठित टीम को निर्देशित किया है कि एफसीआई गोदाम में रखे खाद्यान्न की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नमूने भरकर जांच कराई जाए। रिपोर्ट के आधार पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित हो। आदेश से एफसीआई में हड़कंप मचा हुआ है।
स्कूली बच्चों को भी बंट रहा खराब अनाज
सरकारी प्राइमरी स्कूलों में बच्चों के मिड डे मील के लिए जो अनाज दिया जाता है, उसकी गुणवत्ता पर भी लगातार सवाल उठते रहे हैं। इसके साथ बच्चों को मिलने वाले अन्य खाद्य पदार्थों के लिए एफसीआई ही गेहूं-चावल आदि उपलब्ध कराता है। गरीबों को भी सस्ता अनाज एफसीआई गोदामों से जारी होता है। अमर उजाला में लगातार प्रकाशित राशन घोटाले और खराब खाद्यान्न वितरण की खबरों का संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन ने कठोर कार्रवाई करने के मूड में है।