बरेली। बरेली कालेज सभागार में शनिवार को बालमन के चितेरे निरंकार देव सेवक का जन्मशताब्दी समारोह मनाया गया। यहां सेवक जी द्वारा लिखित बाल कविताओं की पुस्तक के संकलन को संरक्षित करने के लिए साहित्यकारों और गणमान्य लोगों ने पुस्तकालय अथवा पीठ निर्माण की मांग प्रशासन से की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह और कार्यक्रम अध्यक्ष रमेश चन्द्र शर्मा ‘विकट’ रहे।
कार्यक्रम में डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि बरेलीवासी साहित्य प्रेमी हैं और यहां साहित्यिक माहौल भी है। निरंकार देव सेवक बरेली की धरोहर हैं, जिन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता। संचालनकर्ता राजेश शर्मा ने सेवक जी को नमन करते हुए उनके नाम पर पीठ स्थापित करने की मांग की ताकि लोग उनके कृतित्व और व्यक्तित्व को जानकर प्रेरणा ले सकें। लेखक सुधीर विद्यार्थी ने सेवक जी से जुड़ी अपनी यादों को सबसे साझा करते हुए उनकी बाल रचनाओं के साथ ही प्रौढ़ लेखन को भी पढ़ने और उसे स्वीकारने की बात कही। फहीम करार ने शहर में किसी स्थान पर ओपन पार्क और पुस्तकालय बनवाने की मांग की ताकि बच्चे वहां खेलें और बाल साहित्य को पढ़ सकें। सुकेश साहनी, गुडविन मसीह, रमेश गौतम, नागेश पांडेय, चन्द्रकान्त त्रिपाठी, रणजीत पांचाल आदि ने सेवक जी के बाल साहित्य के प्रति समर्पण एवं उनकी रचनाओं को सराहा।
बने बाल पुस्तकालय
सेवक जी की पुत्रवधू पूनम सेवक ने मौजूद साहित्यकारों और प्रशासन से सेवक जी की लिखी मूल प्रतियों को सहेजने की मांग की। कहा कि उनके पास करीब 55 पुस्तकें हैं, जिनमें आधी से ज्यादा पुस्तकों के पन्ने फट रहे हैं। पुरानी होने की वजह से उन्हें संभालना मुश्किल हो रहा है। इसलिए फिर से प्रकाशन कराकर उन्हें सहेजकर एक बाल पुस्तकालय बनाया जाए। ताकि बच्चे और बड़े सभी बरेली के बालमन के चितेरे निरंकार देव सेवक से परिचित हो सकें।
पुरस्कृत हुए बच्चे
कार्यक्रम के दौरान नन्हे-मुन्ने बच्चों ने निरंकार जी की कविताओं का पाठ किया तो समूचा हाल तालियों की गूंज से गुंजायमान हो गया। बालमन के चितेरे कवि की रचनाओं को बाल मुख से पाठ होना विशेष रूप से सराहा गया। बेहतर प्रस्तुति पर राजन, सौम्या, जोशी, अंशी सेवक, अशनया बाजपेयी को पुरस्कार से नवाजा गया। कार्यक्रम के दौरान एडीएम प्रशासन रामसेवक द्विवेदी, सिटी मजिस्ट्रेट अशोक संयोजक कुलभूषण शर्मा, डॉ. शशांक शुक्ला आदि लोग मौजूद रहे।