बरेली। सर्दी और बीमारियां साथ-साथ चलती है। इस मौसम में तला-भुना खाना हर किसी को भाता है। इसके अलावा दिन की धूप और रात की सर्द हवा में ठंड लग जाना भी आम होता है। इन दोनों ही वजहों से उल्टी और डायरिया होता है। जिला अस्पताल की ओपीडी में बड़ी संख्या में ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं। वहीं इमरजेंसी और वार्डों में ब्रेन स्ट्रोक, सांस की बीमारी और दिल के रोगियों की बाढ़ सी आ गई है। यह स्थिति फैल्सिपेरम मलेरिया जैसी बेकाबू तो नहीं हैं, लेकिन तकरीबन सभी वार्ड फूल चल रहे हैं।
जिला अस्पताल के डॉ. वगीश वैश्य बताते हैं कि प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने से कॉमन कोल्ड तकरीबन सभी को होता है। सर्दियों में अगर शरीर का ताप 34-35 डिग्री से नीचे चला जाए तो उसे हाइपोथर्मिया कहते हैं। इसमें हाथ-पैर ठंडे हो जाते हैं, सांस लेने में तकलीफ होती है। इससे बचने के लिए तेज ठंड का सामना न करें। कोहरा की वजह से अस्थमा के मरीजों की दिक्कत बढ़ जाती है। दवा सही समय में नहीं देने से अटैक तक पड़ सकता है। डॉक्टर ने बताया कि प्रतिदिन ओपीडी 1200 से 1500 मरीजों के बीच चल रही है। वहीं इमरजेंसी समेत सभी वार्डों में मरीज भर्ती हैं।
यह लक्षण दिखे तो डॉक्टर से परामर्श लें :
चक्कर आना, उल्टी, पेट में दर्द, डायरिया, हल्का बुखार, मांसपेशियों में दर्द, घबराहट
बचने के लिए ये करें
- सिर और कान ढक कर रखे
- गर्म तासीर वाली चीजों का ही सेवन करें
- तापमान बदलने पर भी गर्म कपड़े पहने रहें