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अर्द्धनारीश्वर के रूप में विराजते हैं धोपेश्वर महादेव

Tue, 25 Jul 2017 12:59 AM IST
राजेश यादव, बरेली
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बरेली।
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देवों के देव महादेव की महिमा निराली है। त्रिदेवों में विष्णु बैकुंठ में, ब्रम्हा ब्रम्हलोक विराजते हैं। महादेव ही ऐसे देवता हैं जो पृथ्वी (कैलाश) पर वास करते हैं। धोपेश्वरनाथ का मंदिर ईशानकोण में स्थित है। स्वयंभू अर्द्धनारीश्वर के रुप में शिवलिंग स्थापित है। सात नाथों में इनका प्रथम स्थान माना जाता है।
सावन में महादेव की आराधना और पूजन श्रद्धालु जहां बेल पत्र, दूध, दही, गन्ने के रस, शहद, गंगा जल, घी आदि से करते हैं, वहीं भादो में महादेव का स्वरूप व पूजा का विधिविधान बदल जाता है। धोपेश्वर महादेव का स्वरूप अर्द्धनारिश्वर होने के कारण भादो में आदि शक्ति स्वरूप के रूप में हो जाते हैं। भादो में इनकी पूजा धोपा मइया के रूप में होती है, तब इनकी पूजा सूखे पदार्थ से होती है।
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मंदिर के आचार्य घनश्याम शास्त्री का कहना है कि भादो के अंतिम दो बृहस्पतिवार को जो व्यक्ति रात्रि विश्राम कर कुंड में स्नान करने के बाद घोपा देवी का चालीसा के साथ पूजन-अर्चन करता है उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है। इस चालीसा के पूर्ण होने पर फरीदपुर रोड पर गोपाला सिद्ध मंदिर में पूजन करने का भी प्राविधान है। इस मंदिर का नाम द्रौपदी के गुरु घ्रुम्र ऋषि ने घ्रुमेश्वरनाथ रखा था जो परिवर्तित होकर धोपेश्वरनाथ हो गया। बरेली में सात नाथ हैं। इनमें धोपेश्वरनाथ का पहला स्थान है।
आचार्य घनश्याम शास्त्री ने बताया कि 27 जुलाई को नागपंचमी है। इस दिन काल, सर्पदोष एवं शांति पूजन दोपहर के दो बजे से सायं सात बजे तक 11 वैदिक ब्राह्मणों द्वारा किया जाएगा। 29 व 30 को अखंड रामायण, 31 को धोपेश्वरनाथ का भव्य रूप से अभिषेक किया जाएगा।
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चांदी की परतें उखड़ने लगीं
धोपेश्वरनाथ मंदिर के गर्भगृह में दो द्वार हैं। प्रवेश द्वार (कुंड छोर) की चौखट चांदी से मढ़ी हुई है। इन चौखटों पर विभिन्न मुद्राओं में महादेव की मूर्ति एवं शिवलिंग बने हुए हैं। इनमें लगी चांदी के लगीं परतें गायब होने से चौखट का सौंदर्य प्रभावित हो रहा है।
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