नई व्यवस्था में शराब, बीयर और मॉडल शाप दुकानों के लिए होड़ मची हुई है। पहले चरण में करीब चार हजार आवेदकों ने आवेदन किए हैं। फीस जमा कराने को जिला प्रशासन ने हस्तक्षेप किया था, लेकिन बैंक प्रबंधन ने एक नहीं सुनी, इसलिए आवेदक इधर उधर खूब दौड़े। दस साल बाद सरकार ने एक बार फिर प्रदेश में एक समान आबकारी नीति लागू कराई है। इसमें जटिलताएं ज्यादा हैं, क्याेंकि दुकान आवंटन प्रक्रिया पारदर्शी बनाने के लिए कंप्यूटरीकरण कर दिया गया है, इससे ही लाटरी होगी। वेबसाइट क्रैश होने पर विभाग ने तीन मार्च तक फीस जमा करने की छूट दी थी, डीएम आर. विक्रम सिंह ने लीड बैंक मैनेजर से सहयोग देने को कहा, लेकिन पीएनबी, बड़ौदा बैंक और एसबीआई आदि ने हाथ खड़े कर दिए। जिले में कुल 526 अंग्रेजी, बीयर, देसी और माडल शाप हैं। देसी दुकानों पर बमुश्किल आधे आवेदन हो पाएं हैं जबकि सभी माडल शाप पर आवेदन आएं हैं।
शराब की दुकानों के लिए ऑनलाइन लॉटरी प्रक्रिया वेबसाइट क्रैश होने से बाधित होने के बाद आबकारी विभाग ने फीस जमा करने की तिथि तीन मार्च शनिवार तक बढ़ा दी थी। डीएम ने भी बैंकों को इसमें सहयोग करने का आदेश दिया था, लेकिन कई बैंक शाखाओं ने इसे अनदेखा कर दिया। डीएम ने एसबीआई क्षेत्रीय प्रबंधक राजीव जोशी को दो बार तलब किया था, फिर भी आवेदक फीस जमा करने को परेशान रहे। शनिवार पूरे दिन बैंकों में होली का माहौल था, एसबीआई एजीएम आशुतोष श्रीवास्तव ने स्टाफ की कमी बताकर टहला दिया। आवेदक इधर उधर चकरघिन्नी बने रहे। किसी तरह ब्रांच मैनेजर सुनील शर्मा और एमएसएमई में तपन महरोत्रा ने स्टाफ को लंच पर जाने से रोक कर फार्म प्रोसेस कराए। सोमवार कार्यालय खुलने पर पता चला कि वेबसाइट स्लो होने से तमाम लोगों की फीस आबकारी विभाग सिस्टम में नहीं पहुंच पाई है।