आंवला। सीएचसी में वायरल बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। अस्पताल में रोजाना करीब 400 नए मरीज पहुंच रहे हैं। इसके अलावा चर्मरोग के भी मरीज आ रहे हैं, जिनमें सबसे ज्यादा बच्चे और महिलाएं प्रभावित हैं।
इधर, कई मोहल्लों में गंदगी और जलभराव का समाधान नहीं होने पर लोगों ने दवा छिड़काव व फॉगिंग को लेकर सवाल उठाया है।
डॉक्टरों की ओर से कुल 500 से 600 मरीजों का प्रतिदिन परीक्षण कर उपचार किया जा रहा है। इसमें ज्यादातर लोग वायरल बुखार से पीड़ित मिल रहे हैं। कस्बे के मोहल्ला ताड़गंज, यादवों वाली पुलिया, नई बस्ती के समीप नाला चौक और जगह-जगह फैली गंदगी व खाली प्लॉट में बरसाती पानी से हुए जलभराव से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। स्थानीय निवासी इसे लेकर रोष में है। लोगों का कहना है कि घर-घर में बुखार के मरीज हैं। कई मरीजों का इलाज निजी अस्पतालों व क्लीनिक में चल रहा है।
अमित यादव ने बताया कि उनके परिवार में तेजस यादव व ऋषभ यादव को कई दिनों से बुखार आ रहा है। उनमें डेंगू जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं। वहीं, राधा कश्यप ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से बुखार आ रहा है। बरेली के निजी अस्पताल में उपचार करा कर वापस लौटी है। अभी भी पूरी तरह से स्वस्थ नहीं हूं।
लोगों ने जताया रोष स्थानीय लोगों ने बताया कि नालों की सफाई न होने और जलभराव से मच्छर पनप रहे हैं, लेकिन पालिका प्रशासन मौन बना हुआ है। मोहल्ले में लंबे समय से फॉगिंग और एंटी लार्वा छिड़काव नहीं कराया गया है। इससे संक्रमण फैलने का खतरा और बढ़ गया है।
तीन दिन से अधिक बुखार रहे, तो सलाह लें : चिकित्सा अधीक्षक चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विनय पाल ने बताया कि यह बुखार मौसमी है। ज्यादा चिंता की बात नहीं है। रहन-सहन व खानपान में सतर्कता बरतें। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि अगर बुखार तीन दिन से ज्यादा बना रहे तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जांच कराएं। सरकारी अस्पताल में जांच की सुविधा मौजूद है।
संचारी अभियान के तहत कस्बे के प्रत्येक वार्ड में साफ-सफाई, फॉगिंग व दवा छिड़काव का कार्य क्रमवार तरीके से किया जा रहा है। फिर भी इन मोहल्लों में टीम लगाकर नाले की सफाई, दवा का छिड़काव समेत अन्य कार्य कराए जाएंगे। -प्रदीप गिरी, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका