बैंक के जटिल नियमों और तीसरी लहर की आशंका से और बढ़ गया था तनाव
शनिवार को ही लोन की किस्त न चुका पाने का आया था मेसेज
बरेली। अलमारी बनाने का कारखाना लगभग बंद पड़ा था लेकिन फिर भी कारखाने के कर्मचारियों को वेतन देना पड़ रहा था। घर का खर्च थोड़ा कम कर दिया था लेकिन फाइनेंस कंपनी और बैंक की किस्त का बोझ ब्याज के तौर पर बढ़ता जा रहा था। सचिन के सामने हर महीने करीब 40 हजार रुपये जुटाने की चुनौती थी लेकिन आमदनी आधी भी नहीं बची थी। कोरोना की तीसरी लहर का खतरा भी डरा रहा था। आखिरकार उन्हें इस सबसे निजात पाने के लिए आत्महत्या के अलावा कोई और रास्ता ही नहीं सूझा।
पहले लॉकडाउन ने ही सचिन को काफी तगड़ा झटका दे दिया था लेकिन उसके खत्म होने के बाद वह फिर अपना कारोबार खड़ा कर लोन चुकाने की जद्दोजहद में जुट गए थे। इस बीच बैंक के जटिल नियमों ने भी उन्हें बुरी तरह उलझा दिया। सचिन के पिता कौशल के मुताबिक दस लाख के होम लोन की किस्त करीब 9300 रुपये और दो लाख के पर्सनल लोन की साढ़े चार हजार थी। पर्सनल लोन की लिमिट साढ़े तीन लाख होने के बावजूद कुछ समय बाद ही बैंक ने 80 हजार रुपये जमा करने का नोटिस दे दिया। सचिन बैंक पहुंचे तो तर्क दिया गया कि कारोबार कम होने से उनकी लिमिट कम कर दी गई है।
सचिन ने अपनी एफडी तोड़कर कुछ रकम बैंक में जमा की लेकिन लॉकडाउन खुलते ही होम लोन देने वाली फाइनेंस कंपनी से 25 हजार रुपये जमा करने का संदेश आ गया। दो किस्तों के साथ इसमें ब्याज की भी रकम जुड़ी हुई थी। साथ में चेतावनी भी थी कि किस्त न देने पर हर दिन पांच सौ रुपये की पेनाल्टी पड़ेगी। किसी तरह जोड़तोड़ कर उन्होंने यह रकम बैंक में जमा कर दी। सोचा कारोबार पटरी पर आ जाएगा तो मुश्किलें दूर हो जाएंगी लेकिन फाइनेंस कंपनी ने उनके चालू खाते से पैसे काटने शुरू कर दिए। सिविल खराब होने से डरे सचिन ने फाइनेंस कंपनी के ऑफिस जाकर दूसरे अकाउंट से पैसे काटने को कहा लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया।
कौशल ने बताया कि दोबारा लॉकडाउन लगने से हालत और खराब हो गई। हर महीने करीब 20 हजार रुपये घर का खर्च है, कुछ रकम कारखाने में काम करने वाले कर्मचारियों को भी देनी पड़ती थी। बैंक और फाइनेंस कंपनी की किस्तें जमा करने का बोझ होने की वजह से पूरा परिवार तंगी का सामना कर रहा था। इसी बीच कोरोना की तीसरी लहर की चर्चा शुरू हुई तो सचिन का तनाव और बढ़ने लगा। शनिवार को ही होम लोन की किस्त न जमा हो पाने पर फाइनेंस कंपनी का मेसेज आया था। तनाव में डूबे सचिन शाम पांच बजे तक उनके साथ बैठे रहे। कुछ देर टीवी देखा और शाम साढ़े छह बजे दूसरे मकान पर जाकर खुदकुशी कर ली।
एक-दो दिन में आने वाला है नया मेहमान
सचिन के परिवार में पिता कौशल, मां नीरू देवी, पत्नी सपना और छोटा भाई रचित है। कौशल ने बताया कि दो साल पहले सचिन की शादी सपना से हुई थी। सपना एक-दो दिन में ही मां बनने वाली है। मगर इस घटना ने उन लोगों की खुशियों को मातम में बदल दिया है।